सुध-बुध भूले विधायक,कहीं जुनून तो सवार नही

कहते है जब किसी व्यक्ति को जुनून सवार हो जाता है तो उसे न अपने आगे और न अपने पीछे कुछ नही दिखाई पडता और वह किसी की परवाह किये बगैर केन्द्रित होकर दौडता चला जाता है। उसे तो केवल लक्ष्य दिखाई देता है,इसलिये शायद किसी ने कहा है जुनूनी व्यक्ति न अपनी बुराई की फिक्र करता है और न वाह वाही के लिए मरता है।यानी कि सुध-बुध भूलकर वह बढता चला जाता है कुछ ऐसा ही हाल इन दिनों कोतमा विधायक सुनील सराफ का दिखाई पड रहा है। क्षेत्र की जनताओं की समस्याओं को लेकर विधान सभा क्षेत्र से भोपाल और भोपाल से दिल्ली जाकर सौगाते लाते हुए क्षेत्र की जनता को समर्पित करने में लगातार चल रहे हैं।

कोतमा- वैसे तो राजनीति समाजसेवा की वह लाईन है जिसका क्षेत्र इतना व्यापक है कि व्यक्ति खुद के लिए समय नही निकाल पाता है,लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते है समाजसेवा की भावना लेकर राजनीति में जरूर आ जाते है लेकिन वहां कुछ मुकाम मिलने के बाद जन सेवा का भाव भूलकर खुद की जरूरतों में इतना मसगूल हो जाते है कि जिस सोच से वह आगे बढ़े उसे याद ही नही रख पाते। लेकिन कुछेक ऐसे व्यक्ति भी होते है जो सेवा का अवसर मिलने पर बिना समय गंवाये हर पल जनता की सेवा में लगे रहते है। हम बात कर रहे है विधान सभा कोतमा क्षेत्र के युवा विधायक सुनील सराफ की जिन्होंने बीते एक सप्ताह में विधानसभा क्षेत्र को कई सौगाते दी। विधानसभा कोतमा में कई दशकों से जनता मांग करती रही और चुने गये विधायक हां हां कर आश्वासन देते रहे,लेकिन किसी ने वह कार्य नही किया जो बीते एक साल में पहला अवसर मिलने पर विधायक सुनील सराफ ने जनता के हित के लिए किया।

नही थके कदम-
बीते सप्ताह क्षेत्र की जनता ने जो समस्याऐ विधायक के सामने रखी जिले के प्रशासनिक स्तर की समस्यओं का समाधान स्वयं अधिकारियों से मिलकर कराने के बाद महत्वपूर्ण कार्यो की स्वीकृति के लिए विधायक सुनील सराफ भोपाल व दिल्ली में डटे रहे वहां से कार्यो की स्वीकृति मिलते ही वह 28 फरवरी को सुबह छत्तीसगढ़ संपर्कक्रांति से वापस अनूपपुर पहुंचे जहां उन्होंने कार्यकर्ताओं से दो घंटे मुलाकात के पश्चात् विधानसभा क्षेत्र के प्रस्तावित कार्यो को लेकर अधिकारियों से मुलाकात की उसके बाद वह अपने परिवार के बीच नही पहुंच सीधे राजनगर पहुंचकर महाविद्यालय का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने क्षेत्र के परिवारजनों के बीच पहुंचकर उनका दुख सुख बांटा और राजनगर, डोला, डूमरकछार में पानी के संकट के समाधान के लिए जीएम से चर्चा की। दूसरे दिन भी वह घर नही पहुंचे लगातार जनता के बीच जाकर कहीं भूमि पूजन तो कही लोकार्पण कर जनहित में सेवायें समर्पित की। 

इधर शासकीय महाविद्यालय राजनगर पर निरीक्षण करने पहुंचे  विधायक - 
यूँ तो कहा जाए की देश के कुल बजट के राशि के ढाई प्रतिशत को बढ़ाकर कर साढ़े छः प्रतिशत शिक्षा एवं शिक्षण संस्थानों के लिए उपयोग किया जाना सुनिश्चित होने वाला है।अब और भी आधुनिक प्रणाली को शिक्षा का स्तर बढ़ाने के लिए उपयोग में लाया जाने वाला है,पर इसी के विपरीत एक एक सुविधा को तरस रहा है,भाजपा सरकार के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आकर शासकीय छात्र विद्यालय को महाविद्यालय बनाने की हरी झंडी देकर चले गये,उस वक्त के तत्कालीन गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह जी आए थे इस महाविद्यालय का उद्घाटन करने,पर उद्घाटन करने से क्या कर्तव्य पूर्ण हो गया?एक महाविद्यालय संचालन के लिए क्या क्या मूलभूत आवश्यक्ताए होती है और किन किन जद्दो जेहद का सामना करना पड़ता है,क्या उन्हें पता था?अब क्रमवार अगर लिखना प्रारम्भ कर दे तो पूरा अंक भर जाएगा की कितनी समस्याओं से जूझ रहा यह महाविद्यालय।

तुरन्त नए कमरे बनाने का आदेश पारित- 

निरीक्षण के दौरान विधायक जी ने देखा मात्र दो कमरो में चल रहा पूरा महाविद्यालय छात्रों को बैठने के लिए जगह भी पर्याप्त नहीं थी विधायक जी द्वारा तुरंत ही एक अतिरिक्त कमरा बनाने का आदेश पारित किया !
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