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योग भारत की अमूल्य धरोहर, इसे दैनिक जीवन का बनाएं हिस्सा - डॉ संगीता प्रजापति

अनूपपुर - 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोतमा में आयुष विभाग द्वारा डॉक्टर संगीता प्रजापति ने योगाभ्यास कराया जिसमें लगभग 35 सदस्यों ने भाग लिया और योगाभ्यास के महत्व को समझा।

डॉक्टर संगीता प्रजापति ने योग का महत्व बताते हुए कहा कि योग भारत की प्राचीन सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक धरोहर है, जो व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आत्मिक रूप से स्वस्थ बनाता है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली और बढ़ती स्वास्थ्य चुनौतियों के बीच योग को दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाना समय की आवश्यकता है।उन्होंने नागरिकों से नियमित योगाभ्यास, संतुलित जीवनशैली और स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वस्थ शरीर जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है और योग उसके संरक्षण का सबसे सरल एवं प्रभावी माध्यम है।योग दिवस के अवसर पर उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए प्रधानमंत्री के "एक पेड़ मां के नाम" अभियान से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि बढ़ते तापमान और बदलते मौसम चक्र को देखते हुए प्रत्येक व्यक्ति को पौधरोपण कर उसके संरक्षण का संकल्प लेना चाहिए।

योग की विभिन्न मुद्राओं का हुआ अभ्यास

योगाभ्यास कार्यक्रम में शामिल लोगो ने योग के विभिन्न आसनों, प्राणायाम और ध्यान की क्रियाओं में भाग लिया। उन्होंने बैठकर, पीठ के बल लेटकर, पेट के बल लेटकर, खड़े होकर किए जाने वाले आसन किए। इस दौरान सामूहिक रुप से ग्रीवा चालन, स्कंध संचालन, ताड़ासन, वृक्षासन, पादहस्तासन, कटिचक्रासन, दण्डासन, वज्रासन, तितली आसन, उष्ट्रासन, शशांकासन, उत्तानमंडूकासन, वक्रासन, मकरासन, सेतुबंध आसन, उत्तानपादासन, पवनमुक्तासन और शवासन किए। आसनों के बाद कपालभाति, नाड़ीशोधन, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, आदि प्राणायाम किए।
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