एसईसीएल ने खोद रखा मौत का बंद पड़ा ओसीएम


बन्द ओ सी एम से जान जोखिम में डाल कर छात्र जाते है विद्यालय, आये दिन होती है पालतू जानवरों की मौत,कई माता पिता अपने पुत्र खो चुके है,बन्द पड़ी ओ सी एम कोयला खदानों पर कालरी प्रबंधन और प्रशासन की उदासीनता, लापरवाही का कारण बन गया मौत का कुआँ बन्द ओ सी एम।

कोतमा- एसईसीएल जमुना कोतमा क्षेत्र अंतर्गत कई भूमिगत खदान व ओसीएम खुली खदान कोयले की खोली गई और कोयले का उत्पादन करके अच्छा खासा मुनाफा कमाया और कोयला खत्म होने के उपरांत मौत का कुआं जैसा खोदकर कॉलरी प्रबंधन ने खुला छोड़ दिया गया। 10 से 15 वर्ष होने को आए 4 नंबर ओसीएम एवं लतार सड़क मार्ग पर जमुना ओसीएम बंद होने को आए किंतु एसईसीएल कालरी प्रबंधन नियम विरुद्ध कार्य व शासन के सही मापदंडों का पालन न करते हुए अपनी मनमानी की गई। आज क्षेत्र की स्थानीय आम जनता एवं उनके मवेशियों को ऐसे ही मरने के लिए बन्द पड़ी खदानों में खुला छोड़ दिया गया,आए दिन बंद पड़ी ओसीएम की खाई पर मौत जैसी दुर्घटनाएं आम बात हो गई है पालतू जानवर पानी पीने के चक्कर में उस खाई पर जाकर अपनी जान गवा बैठते हैं ।


पूर्व में बंद खदानों में हो चुकी है कई मौते-
 पूर्व वर्ष में हरद ओसीएम में नहाने और मछली पकड़ने के चक्कर में गए लालो को कई माँ-बाप ने खो दिया है , कई लोगों को इन खाईयो में डूबते हुए बचाया भी गया है बंद ओसीएम में  ऐसी घटनाएं होना आम बात हो गई है लेकिन कालरी प्रबंधन एवं प्रशासन अमला कुम्भकर्णीय नींद में सोता हुआ नजर आता है और कोई बड़ी घटना घटित होने के बाद कालरी प्रबंधन व प्रशासनिक अमला सो कर जागता है।


मापदंड को किया जाता है दरकिनार-
अब तक एसईसीएल कंपनी यदि कोई भी शासकीय राजस्व भूमि,वन भूमि,पट्टाधारी स्थानीय लोगों की जमीन अधिग्रहण करती है तो शासन से यह भी अग्रीमेंट किया जाता है कि कोयले का उत्पादन करने के बाद कोयला खत्म होने के उपरांत पहले की स्थिति करके भूमि को समतलीयकरण रेत व मिट्टी से करके उपजाऊ जमीन पहले की ही स्थिति में बनाकर अग्रहित भूमि को शासन को सौपनी होगी।


प्रबंधन ने बन्द ओ सी एम पर नही किया तार फिनिशिंग का कार्य-
एसईसीएल जमुना कोतमा क्षेत्र में जितनी भी बंद पड़ी भूमिगत खदाने व ओसीएम को बिना समतलीयकरण करे बिना भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एसईसीएल जमुना कोतमा क्षेत्र अंतर्गत तीन ओसीएम और तीन भूमिगत खदाने कई वर्षों से बंद हो चुकी है और इन बन्द पड़ी खदानों का लीज भी खत्म हो चुका है। कालरी प्रबंधन बन्द पड़ी खदानों में मिट्टी व रेत से समतलीकरण न करने के कारण कई बेरोजगार युवक और महिलाएं जान जोखिम में डालकर प्रतिदिन बन्द पड़ी खदानों से कोयले की चोरी करती है अपने परिवार के दो वक्त के भोजन के लिए बन्द पड़ी खदानों में कोयला खोदते समय जान तक जा चुकी है कुछ दिनों पूर्व ही बन्द पड़ी खदान से कोयला निकालते समय मिट्टी धसकने के कारण मौके पर ही युवक की मौत हो गई थी।


बड़ी घटना का किया जा रहा इंतजार-

बड़ी घटना घटित होने के बाद कालरी प्रबंधन और प्रशासनिक अमला अपनी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए एक दूसरे पर जिम्मेदारीया थोपने पर जुट जाते हैं। 4 नंबर ओसीएम 14 साल से बंद पड़ी खदान में वैसे तो नाम मात्र का सुरक्षा पहरेदार भी रखा गया है और 10 से 15 साल पहले तार फिनिशिंग का कार्य कुछ स्थानों पर किया गया कुछ स्थानों पर छोड़ दिया गया है 50 मीटर की दूरी पर बड़ी बस्ती का बसेरा बना हुआ है स्थानीय लोग को दिन रात डर बना रहता है कि उनके नावनिहल बच्चे किस वक्त बन्द पड़ी ओसीएम 4 न. भालूमाड़ा पर कब बड़ी दुर्घटना का शिकार बन जाये। और अपने पालतू जानवरो पर स्वयं ही 24 घंटे सुरक्षा की निगरानी रखनी पड़ती है थोड़ी सी भी लापरवाही बरतने पर पालतू जानवर पानी पीने और खाने-पीने की तलाश में बन्द पड़ी खदान में पहुंच जाते है जिससे उन्हें मौत को गले लगाना पड़ता है।

कहना है- मैं निरीक्षण कराता हूँ।बन्द पड़ी ओसीएम तार फिनिशिंग के काम किये गए हैं मीडिया द्वारा जानकारी दी जा रही है कि कई जगह तार फिनिशिंग का कार्य नहीं किया गया है या तार एवं पोल टूटे पड़े हुए हैं।इन सबका निरीक्षण मैं करवाता हूँ।

असित कुमार पांडेय
महाप्रबंधक जामुन कोतमा क्षेत्र
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