कोतमा -प्रदेश में सरकार बदले एक साल हो गया लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्था पुराने ढर्रे पर चल रही है लोगो को स्वास्थ्य सुविधाएं देने के नाम पर प्रदेश सरकार आज छलावा करती हुई नजर आ रही है। जिले के शासकीय अस्पतालों का हाल बेहाल देखते बनता है स्वस्थ्य केंद्र व प्राथमिक स्वस्थ्य केंद्र तो खोल दिए जाते हैं कोतमा ब्लॉक में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की संख्या दो जिसमें कोतमा,कोठी, प्राथमिक स्वस्थ्य केंद्र मलगा,नीगवानी,बेलियाबड़ी, चोडी पोड़ी,पसान, पयारी,राजनगर,बिजुरी एवं उपस्वास्थ्य केंद्र की संख्या 44 बताई जाती है और जहां जर्जर उपस्वास्थ्य केंद्रों में न तो डाक्टर रहते हैं न कोई स्टाफ अक्सर ताले लटके हुए नजर आते हैं जब प्राथमिक स्वस्थ्य केंद्रों में स्वस्थ्य व्यवस्था देने के नाम पर मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ होता हो तो विवश होकर मजबूरी में मरीज झोलाछाप डॉक्टरों की शरण में जा पहुंचते है और झोलाछाप डॉक्टरों के इलाज से आए दिन कोई न कोई मरीज मौत के मुंह में चला जाता है। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग उन पर अंकुश लगाने में नाकाम है। विभाग के पास ऐसे डॉक्टरों की अनुमानित संख्या तक नहीं है। ऐसे में कार्रवाई तो दूर, उनकी पहचान करने में ही काफी वक्त लग सकता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि झोलाछाप डॉक्टरों की संख्या घटने के बजाए दिनोंदिन बढ़ रही है।गांवों व कस्बों में स्वास्थ्य केंद्रों की कमी कहीं न कहीं ऐसे डॉक्टरों के पनपने का कारण बन रही है मरीजों की संख्या इतनी अधिक है कि चाहकर भी लोगों को बेहतर इलाज नहीं मिल पाता। यहीं, वजह है कि गांव व कस्बों की आबादी झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराने के लिए विवश है। झोलाछाप डॉक्टरों की संख्या की सही जानकारी इसलिए पता नहीं चल पाती है कि ऐसे डॉक्टर कार्रवाई के डर से एक जगह ज्यादा दिनों तक टिक कर नहीं रहते।
झोलाछाप डॉक्टर यहां कर रहे इलाज -
कोतमा बाजार, निगवानी,राजनगर,बिजुरी,आमा डॉड,पौरधार,भालूमाड़ा,जमुना, बदरा,प्यारी,चोड़ी,पोड़ी,कटकोना में जगह जगह पर झोलाछाप डॉक्टरों की दुकान संचालित है कुछ झोलाछाप डॉक्टर तो अपना क्लीनिक खोलकर लोगो को दवाई करने के नाम पर लूट रहे हैं और कई डाक्टर ऐसे है जो मोटरसाइकिल लेकर कंधे पर बैग टांगाकर घूम घूम कर सीधे साधे गरीब लोगो को इलाज के नाम पर लूटा जा रहा है मकड़ी के जाल की तरह चारो ओर झोलाछाप डॉक्टरों की भरमार हो गई है न इस ओर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का ध्यान जा रहा है या फिर ध्यान देकर स्वस्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी झोलाछाप डॉक्टरों को अपना आशीर्वाद दे रखे हैं जिससे निडर होकर झोलाछाप डाक्टरों का व्यापार फलफूल रहा है।
झोलाछाप डॉक्टरों का निर्धारण -
ऐसा कोई भी चिकित्सक जो इंडियन मेडिकल काउंसिल व सेंट्रल काउंसिल फॉर इंडियन मेडिसिन से पंजीकृत न हो, झोलाछाप डॉक्टर की श्रेणी में आता है। साथ ही मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के अधिनियम 1956 के शिड्यूल 1, 2 व 3 के तहत चिकित्सीय योग्यता नहीं रखता हो ऐसे सभी डॉक्टर जो प्रैक्टिस करने वाले प्रदेश से पंजीकृत न हों, जो मुख्य चिकित्सा के अधीन पंजीकृत न हो तकनीकी भाषा में ऐसे डॉक्टरों को अवैध डॉक्टर की संज्ञा दी गई है।
कहना है -
क्षेत्र में जल्द ही झोलाछाप डॉक्टरों के ऊपर जिला स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी के साथ टीम बनाकर झोलाछाप डॉक्टरों के क्लिनिको पर छापामार कार्यवाही की जाएगी।
डॉ के एल दीवान
खंड चिकित्सा अधिकारी,कोतमा