वर्ष 2016 में 17 अपराधियो को आजीवन कारावास और 11 अपराधियो को 10 वर्ष या उससे अधिक की सजा सुनाई गई।
वर्ष 2017 में 14 अपराधियो को आजीवन कारावास और 9 अपराधियों को 10 वर्ष या उससे अधिक तथा 5 अपराधियों को 5 वर्ष या उससे अधिक की सजा सुनाई गई।
वर्ष 2018 में 18 अपराधियों को आजीवन कारावास और 12 को 10 वर्ष या उससे अधिक तथा 7 अपराधियों को 5 वर्ष या उससे अधिक की सजा सुनाई गई सुनाई गई।
उपसंचालक अभियोजन श्री राम नरेश गिरी द्वारा बताया गया कि मध्यप्रदेश शासन ने गत वर्ष नवीन राज्य, मुकदमा प्रबंधन नीति वर्ष 2018 लागू कराने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाहन करने वाले संचालक अभियोजन श्री राजेंद्र कुमार जी के कुशल एवं प्रभावी मार्गदर्शन में जिलों को सौपे गए दायित्वो के तहत जिले के संपूर्ण अपराधिक अभियोजन के पर्यवेक्षण एवं नियंत्रण का दायित्व उपसंचालक अभियोजन को सौंपी गई है। जिसके तहत उपसंचालक अभियोजन जिले में सभी अपराधिक प्रकरणों की सूक्ष्मता से अभियोजन संचालन की निगरानी करते हैं। जिसके परिणाम स्वरूप वर्ष 2017 की तुलना में यह वर्ष 2018 में सजा का प्रतिशत बढा़ है। कुछ मामलों में जैसे लोकायुक्त (भ्रष्टाचार)के मामलों में गत वर्ष सजा का प्रतिशत 100 प्रतिशत रहा है।गत वर्ष भ्रष्टाचार के निराकृत प्रकरणों में आरोपियों को 4-4 वर्ष की कारावास एवं 10000-10000रू.के जुर्माने की सजा हुई है।
इस वर्ष का सबसे चर्चित मामला जिला एवं सत्र न्यायाधीश जिला अनूपपुर द्वारा दिनांक 31/12/2018 को निर्णित हुआ जिसमें आरोपी राजू उर्फ हेमराज महरा ग्राम लोहासुर थाना- कोतमा,जिला अनूपपुर को आजीवन कारावास हुआ। इस प्रकरण में थाना कोतवाली के अपराध क्रमांक 20/14 था।इसमें आरोपी ने मृतिका तुलसी महाविद्यालय अनूपपुर में बी.कॉम. की परीक्षा देने आई थी,को आरोपी बहला- फुसला कर जंगल में ले गया और जंगल में आरोपी की बात नहीं मानने पर मृतिका का गला दबाकर मार डाला था।
इस संबंध में जिला अनूपपुर में पदस्थ उप संचालक एवं जिला अभियोजन श्री रामनरेश गिरी जी का कहना है कि आगामी वर्षों में भी जिले में दोष सिद्ध का प्रतिशत बढ़ाने के लिए अभियोजन प्रयासरत है
