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महाविद्यालय कोतमा में शिक्षको की गुटबाजी चरम पर,कॉलेज प्रशासन को ध्यान देनी की जरूरत

कोतमा - इन दिनों शासकीय महाराजा मार्तंड महाविद्यालय कोतमा में जम कर शिक्षकों में गुट बाजी चल रही है,एक गुट अपनी मान प्रतिष्ठा को लेकर अपने आप को बड़ा साबित करने में लगा हुआ है तो एक गुट दूसरे गुट के ऊपर मनमानी का आरोप लगा रहा है या यू कहे कि दूसरे गुट को अपने आगे बौना साबित करने का प्रयास कर रहा है।महाविद्यालय में गुटबाजी का आलम यह है कि अगर एक गुट का कोई शिक्षक कॉलेज बंद होने के सही समय पर अपने घर भी चला जाए तो दूसरा गुट घड़ी की ओर देख कर समय देखने लगता है।कोतमा महाविद्यालय में शिक्षक गुटबाजी कर अपनी मान प्रतिष्ठा और पहुंच पकड़ के लिए तो लड़ ही रहे हैं साथ ही महाविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों का भविष्य भी अंधेरे में धकेल रहे हैं,ऐसा इसलिए कि अगर कोई छात्र/छात्रा एक गुट के शिक्षक से विनम्र व्यवहार करता है तो दूसरे गुट के शिक्षक को इसकी पीड़ा होती है और शिक्षको का दूसरा गुट उस छात्र/छात्रा को परेशान करने में लग जाता है चाहे वह परीक्षा में नंबर देने के बहाने हो या फिर क्लास में भाग लेने के बहाने।कोतमा महाविद्यालय में गुटबाजी इतनी चरम पर पहुंच गई है कि एक गुट कॉलेज में पढ़ने वाले छात्र/छात्राओं से दूसरे गुट के शिक्षक ऊपर कुछ न कमी ढूंढवा कर ज्ञापन दिलवाता है और अपने आप को बड़ा साबित करने की कोशिश करता है।हालही में एक उदाहरण देखने को मिला कि महाविद्यालय में कुछ प्राध्यापकों की ड्यूटी कोविड-19 के परिपेक्ष में लगाई गई और कुछ प्राध्यापकों का नाम उस ड्यूटी आर्डर में नहीं लिखा गया। उसका कारण सिर्फ यह था कि उन प्राध्यापक को महाविद्यालय हमेशा की तरह रोजाना आना है परंतु गुटबाजी का शिकार हुआ महाविद्यालय और उसके कुछ प्राध्यापकों के द्वारा आर्डर को प्रसारित किया गया कि वह प्राध्यापक महाविद्यालय ही नहीं आएंगे जबकि हकीकत यह है कि वह प्राध्यापक महाविद्यालय रोज आयेंगे।पर महाविद्यालय कोतमा में गुटबाजी का यह आलम है कि दूसरे गुट ने आदेश में नाम न देखकर इतना बड़ा हंगामा खड़ा कर दिया कि मानो आदेश में उन प्राध्यापक का नाम नही है मतलब वह घर में चैन से सोएंगे और कॉलेज प्रशासन ने उन्हें सो कर पेमेंट देने का कोई एग्रीमेंट कर लिया हो। शिक्षको की इस गुटबाजी का नुकसान कही न कही महाविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र/छात्राओं की शिक्षा पर जरूर पड़ रहा है,जिस ओर महाविधालय प्राचार्य को ध्यान देना चाहिए और गुटबाजी खत्म करवानी चाहिए।
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