भाजपा ने अनूपपुर जिले के 692 बूथों पर मनाई पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती
अनूपपुर-भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिकारियों द्वारा 25 सितंबर 2021 को एकात्म मानववाद के प्रेरणा स्रोत पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के उपलक्ष में जिले के 692 बूथों पर विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करते हुए उनकी जयंती मनाई गई ।भाजपा जिलाध्यक्ष बृजेश गौतम फुनगा में पंडित दीनदयाल उपाध्याय जयंती पर उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा की धन दौलत से नहीं व्यक्ति विचारों से महान बनता है जैसे पंडित दीनदयाल उपाध्याय बने, गरीब परिवार में जन्मे दीनदयाल उपाध्याय अपने विचार से भारत को विश्व गुरु बनाने में लगातार लगे रहे और अपने जीवन का तिल तिल समाज के लिए समर्पित किया आज उनके विचारों के कारण एक छोटी सी पार्टी देश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर देश के अंदर खड़ी है भाजपा एक वट वृक्ष के रूप में यदि खड़ी है तो उसके पीछे पंडित दीनदयाल उपाध्याय का अथक परिश्रम है ।जगह जगह पर आयोजित किए गए कार्यक्रम में भाजपा के कार्यकर्ता और पदाधिकारियों ने उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए उन्हें नमन किया, भाजपा मंडल पसान में अध्यक्ष सिद्धार्थ त्रिवेदी के मार्गदर्शन में 22 बूथों पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया वार्ड नंबर 3 बूथ पर मंडल अध्यक्ष सिद्धार्थ त्रिवेदी भाजपा युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष सुनील गौतम भाजपा जिला मीडिया प्रभारी राजेश सिंह चंडी कांत झा राजेश बाथम युवा मोर्चा के स्वप्निल पांडे जय नरेश सिंह शारदा द्विवेदी रंजीत नामदेव के अलावा तमाम कार्यकर्ता और पदाधिकारी उपस्थित रहे तो वही कोतमा बिजुरी राजनगर अनूपपुर राजेंद्रग्राम पुष्पराजगढ़ अमरकंटक बेनीबारी करपा जैतहरी वेंकटनगर तथा ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यक्रम का आयोजन किया गया उपरोक्त जानकारी भाजपा जिला मीडिया प्रभारी राजेश सिंह द्वारा दी गई।
वार्ड नं 17 में मनाई गई दीनदयाल उपाध्याय की जयंती -
पसान नपा अंतर्गत वार्ड नं 17 में भाजपा जिला उपाध्यक्ष राम अवध सिंह के नेतृत्व में पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पार्टी पदाधिकारियों तथा कार्यकर्ताओं ने चित्र पर माल्यार्पण कर पंडित दीनदयाल उपाध्याय को याद किया।भाजपा जिला उपाध्यक्ष राम अवध सिंह ने बताया कि पंडित जी का जन्म 25 सितंबर 1916 को मथुरा जिले के नगला चंद्रभान ग्राम में हुआ था। पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चितक और संगठनकर्ता थे, वे भारतीय जनसंघ के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने भारत की सनातन विचारधारा को युगानुकूल रूप में प्रस्तुत करते हुए देश को एकात्म मानववाद नामक विचारधारा दी। वे एक समावेशित विचारधारा के समर्थक थे और एक मजबूत व सशक्त भारत का निर्माण चाहते थे। राजनीति के अतिरिक्त साहित्य में भी उनकी गहरी अभिरुचि थी, उन्होंने हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं में कई लेख लिखे जो विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए।