अव्यस्थाओ के बीच संचालित हो रही आमाडांड खदान,पीने के पानी तक के लिए भटकते हैं कोल कर्मचारी..?
अनूपपुर - जमुना कोतमा क्षेत्र एसईसीएल की जीवनदायिनी कहीं जाने वाली आमाडांड खुली खदान परियोजना में बीते कई महीनो से प्रभावित किसानों और कालरी प्रबंधन के बीच मुआवजे और रोजगार को लेकर गतिरोध की स्थिति उत्पन्न होती रही है।वही कई महीनो पूर्व कोयला उत्पादन के लिए आस पास की भूमि अधिग्रहित की गई थी। जिसमें प्रभावित किसानों को रोजगार दिए जाने की बात भी कही गई थी।लेकिन प्रभावित किसानों को मुआवजा व नौकरी न मिलने को लेकर कई महीनो से किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी था और समय-समय पर उनके द्वारा कोयले का उत्पादन भी बंद कराया जाता रहा है।वही बात करे कॉलरी प्रबंधन की तो खदान के संचालन में कई तरह की अव्यवस्थाएं भी देखने को मिलती है,जिस ओर जिम्मेदार ध्यान नहीं देते।जिसका खामियाजा खदान में काम कर रहे कर्मचारियों को उठाना पड़ता है।
नए जीएम के आने से खदान शुरू करने प्रयास हुए सार्थक -
जमुना कोतमा क्षेत्र अंतर्गत आमाडांड खदान अधिग्रहित भूमि से प्रभावित किसान अपनी भूमि के एवज में मुआवजा और नौकरी की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे थे जिसके कारण खदान काफी दिनो तक बंद पड़ी हुई थी और खदान से कोयले का प्रोडक्शन ठप्प पड़ गया था।किसानों की वजह से खदान से कोयले का प्रोडक्शन ठप्प होने के कारण क्षेत्र में कोयले का संकट गहराने लगा और साथ ही साथ खदान के कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन भुगतान में भी कंपनी को अतिरिक्त खर्च का वहन करना पड़ा।और कई बार कॉलरी के नेताओ,अधिकारियों एवम क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के साथ किसानों की बैठक भी आयोजित हुई लेकिन बैठक बेनतीजा रही।उसके बाद जमुना कोतमा क्षेत्र के नए जीएम के रूप में हरजीत सिंह मदान की पदस्थापना हुई और उन्होंने प्रभावित किसानों के साथ,कंपनी के अधिकारियों,प्रशासनिक अधिकारियों,क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों,ग्रामीणों और प्रबंधन के साथ बैठक की।जिसका नतीजा यह रहा कि खदान पुनः शुरू हो गई और खदान से फिर से कोयले का प्रोडक्शन होना शुरू हो गया।निश्चित ही जीएम हरजीत सिंह मदान सिंह द्वारा खदान चालू करवाने को लेकर की गई पहल सराहनीय रही है।
कर्मचारियों को नही मिलती कैंटीन की सुविधा -
एसईसीएल जमुना कोतमा क्षेत्र अंतर्गत आमाडांड खदान इन दिनों काफी अव्यवस्थाओं के बीच संचालित हो रही है। खदान कैंपस के अंदर स्तिथ एकमात्र कैंटीन जिसकी स्तिथि काफी दयनीय है। आमाडांड खुली खदान परियोजना कैंटीन में ढेरो सारी अनियमितताएं है जिसे देखने सुनने वाला कोई नहीं है।हमारे कॉलरी सूत्रो ने जानकारी देते हुए बताया कि कैंटीन का ठेका खत्म हुए लगभग 2 साल हो गए हैं पहले ठेका जमुना निवासी किशोर कुमार के नाम पर जरूर था पर किशोर कुमार ने कैंटीन संचालित ही नहीं की।वही बात की जाए कैंटीन में फैली अव्यवस्थाओं की तो कैंटीन में बैठने के लिए फर्नीचर तक नहीं है।समान को ठंडा रखने के लिए रखा जाने वाला काउंटर फ्रीजर खराब होकर कैंटीन के अंदर ही एक किनारे पड़ा हुआ है।साथ ही कैंटीन के अंदर लगे नाल से गर्मियों के दिनों में गर्म पानी निकलता है जिसे कंपनी के कर्मचारी पी भी नहीं सकते।बहरहाल अभी तो आमाडांड खदान में काम करने वाले कर्मचारियों को पीने के शुद्ध पानी के लिए यहां वहां भटकना पड़ता है। वहीं सूत्रों ने बताया कि खदान के अंदर कैंटीन के पास फ्रीजर महज दिखावे के लिए लगा हुआ है,जो पीने के लिए न तो शुद्ध पानी देता है और न ही ठंडा पानी देता है।खदान के अंदर काम करने वाले कर्मचारियों,अधिकारियों के लिए पीने के शुद्ध पानी की कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी प्रबंधन द्वारा नहीं की गई है यहां तक की सब एरिया ऑफिस में किचन के अंदर आर ओ जरूर लगा हुआ है लेकिन वह भी महीनो से खराब पड़ा हुआ है।
डस्ट धूल से खराब हो रही तबियत -
जमुना कोतमा क्षेत्र अंतर्गत आमाडांड खदान में कॉलरी प्रबंधन ने द्वारा हर रोज समय-समय पर खदान के अंदर काम कर रहे कर्मचारियों को धूल डस्ट से हो रही बीमारियों से बचाने के लिए पानी का छिड़काव समय-समय पर किया जाता है,ताकि कोल डस्ट कम मात्रा में उड़े जिससे खदान के अंदर काम कर रहे कर्मचारियों,अधिकारियों सहित वायु प्रदूषण में कोल डस्ट मिलने से हमारा वातावरण भी प्रदूषित न हो और लोग गंभीर बीमारियो से ग्रसित हो कर बीमार न पड़े। वहीं सूत्रों की माने तो आमाडांड खदान के अंदर पानी सिंचाई का काम करने वाले वॉटर टैंकर(स्प्रेकलर) का वाटर पंप लगभग 2 माह से खराब पड़ा हुआ है,जिसके कारण खदान के अंदर पानी का छिड़काव सही ढंग से नहीं हो पा रहा है और कोल डस्ट उड़कर खदान में काम कर रहे कर्मचारियों,अधिकारियों के शरीर के अंदर तो जा ही रहा है साथ ही साथ वातावरण में भी फैल कर वातावरण भी प्रदूषित कर रहा है। जानकारों की मानें तो कोल डस्ट के कारण सांस संबंधित बीमारियां अस्थमा, सिलकोसिस, टीवी एवं दमा जैसी भयानक बीमारियो के अलावा कई जानलेवा बीमारियां शरीर में पैदा होती है।
कहना है -
आप एक बार आमाडांड कॉलरी प्रबंधन से मिलकर इस संबंध में बात करे और हमारे द्वारा भी कमियों को दूर करने की पूरी कोशिश की जाएगी।
हरजीत सिंह मदान
महाप्रबंधक,एसईसीएल जमुना कोतमा क्षेत्र