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माफियाओं पर नहीं लग रहा अंकुश



राजनगर- जंगल के अंदर नदियों से अवैध उत्खनन पर ना तो प्रशासन की सख्ती काम आए और खनिज विभाग की कार्यवाही वजह प्रशासन ने करवाई के लिए कोई ठोस रणनीति भी तैयार नहीं कर रखी है यही वजह है कि वन परिक्षेत्र राजनगर के जंगलों से धड़ल्ले से रेत का अवैध उत्खनन हो रहा है और प्रशासनिक अमला चुप्पी साधे हुए है नदी नालों के पास से जुड़े गांव के ग्रामीणों ने यह कहा कि खनिज विभाग को जंगल विभाग  के ही अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है

कमाई का खेल=बाजार में एक रेत की ट्राली से 1700 से 2000 रुपए की बिक्री हो रही है इस दौरान मजदूर एक ट्रॉली को भरने का ₹150 लेते हैं इसके अलावा रेत माफिया प्रति ट्रॉली 1200 से 1500 तक का मुनाफा कमाते हैं मजदूर लगातार रेत खोदकर उसे इकट्ठा कर लेते हैं ट्रैक्टर ट्राली आते ही जल्द उसे भरकर रवाना कर दिया जाता है !

 बावजूद भी प्रशासन चाहे कितने भी दावे कर स्थानीय शासकीय नुमाइं

जंगलों से निकल रही रेत= राजनगर क्षेत्र से  बेधड़क वेरुप्पू धड़ल्ले से वन विभाग की भूमि  से  रोजाना  20 से 25  ताली अवैध रीत वन विभाग की भूमि से  उत्खनन किया जा रहा है राजनगर क्षेत्र से जुड़े जंगलों से ट्रैक्टरों के माध्यम से अवैध रेत का परिवहन जारी है यह रेत  क्षेत्र  सटे जंगल एवं छोटे बड़े नालों से निकाली जा रही है बताया गया कि इस रेत के कारोबार में फॉरेस्ट विभाग का पूरा संरक्षण प्राप्त है जिससे रेत का अवैध कारोबार चल रहा है इससे शासन को प्रतिदिन लाखों का नुकसान उठाना ही पड़ रहा है साथ ही जिले में बैठे अधिकारियों की भी छवि धूमिल हो रही है वन विभाग की जमीन से अवैध उत्खनन रोजाना हो रहा है लेकिन राजनगर के वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी  का खुला संरक्षण जैसे प्राप्त हो

किसका है अवैध कारोबार =सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस पूरे कारोबार में लगभग 6 से 7 कारोबारियों के द्वारा यह कार्य का संचालन किया जा रहा है यह राजनगर क्षेत्र से सटे जंगलों के अंदर कुल्हड़िया नाला  भलमुडी जंगल डूमरकछार क्षेत्र एवं अन्य स्थानों से रेत निकाल कर कालरी कॉलोनी की रिपेयरिंग एवं सभी क्षेत्र में सप्लाई करते हैं सूत्रों का कहना है की साईडिंग के पास रेत का भंडारण भी किया जा रहा है जबकि यह सारी चीजें जंगल विभाग के संरक्षण में है लेकिन अवैध कमाई के चक्कर में जंगल विभाग के अधिकारी इन माफियाओं को खुला संरक्षण दिए हुए हैं

आंख में बांधी पट्टी=रेत के इस कारोबार से राजस्व को तो चूना लगा ही रहा है लेकिन कार्रवाई करने वाले जिम्मेदार अधिकारी आंख में पट्टी बांधकर सो रहे हैं ग्रामीणों ने बताया कि रेत का अवैध कारोबार अधिकारियों के संरक्षण में फल फूल रहा है जबकि वन विभाग के डिप्टी रेंजर तुलसीदास को पुख्ता जानकारी देने के बाद भी अधिकारी कार्यवाही नहीं करते हैं जंगल क्षेत्र में मनमाना रेत के अवैध उत्खनन से पर्यावरण को भी काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है लेकिन स्थानीय अधिकारी रेत माफियाओं के चंद रुपयों के टुकड़ों में बिके हुए नजर आ रहे हैं

क्या करते हैं साहब=सूत्रों की माने तो जंगल विभाग द्वारा इस पूरे क्षेत्र का जिम्मा जिस अधिकारी को दिया गया है उस अधिकारी की रेत माफियाओं के साथ अच्छी सेटिंग है साहब का माफियाओं के साथ मैनेजमेंट इतना तगड़ा है कि आज तक इन रेत माफियाओं पर कार्यवाही करने यह जांच करने की जहमत तक नहीं उठाई माफियाओं ने फॉरेस्ट विभाग अधिकारियों की सेवा करके जैसे खुला संरक्षण ही ले रखा हो रेत निकालने की भी सेटिंग इतनी अच्छी बना ली है कि सुबह 5:00 बजे से 10:00 बजे तक इसके बाद जरूरत पड़ी तो दोपहर में 1:00 से 3:00 बजे तक का टाइम भी ले लिया है जबकि क्षेत्र में सड़कों के माध्यम से रेत सभी जगह जा रही है लेकिन यहां बैठी पुलिस भी एक कार्यवाही करके जैसे खानापूर्ति कर रही हो या यूं कहें  की  पुलिस भी  अपना  हिसाब  बनाने में  लगी हुई है  इन रेत माफियाओं को खुला संरक्षण वन विभाग व पुलिस ने दे रखी है!
आखिर बीते 3 महीनों तक पूर्णता रेत पर प्रतिबंध होने के बाद शहडोल कमिश्नर का सख्त आदेश था कि कहीं भी रेत का भंडारण पाया जाएगा तो उस पर कार्यवाही की जाएगी लेकिन इन 3 महीनों के बीच में ना तो माइनिंग विभाग के अधिकारी ना ही प्रशासनिक अधिकारियों ने राजनगर क्षेत्र में कोई कारवाही नहीं की जिससे इन रेत माफियाओं के हौसले बुलंद होते नजर आ रहे हैं इससे यह भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि कहीं ना कहीं ऊपर बैठे अधिकारियों को भी इन माफियाओं को जैसे अभय दान प्राप्त हो तभी तो इन मोतियों के ऊपर अब तक कोई कार्यवाही नहीं की जा सकी

इनका कहना है क्षेत्र में अगर वन विभाग की भूमि से रेत उठ रही है और हमारे कर्मचारी कार्यवाही नहीं करते तो मैं जानकारी लेता हूं और अगर उनके रेत माफियाओं के साथ मिलने की जानकारी मिलती है तो उन पर भी सख्त कारवाही की जाएगी

अशोक निगम
कोतमा रेंजर


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