मेट्रो ट्रेन की तरह दरवाजे बन्द होने पर ही चले ट्रेन
ट्रेन से गिरकर छात्रा की मौत दुखद
( मनोज द्विवेदी, कोतमा,जिला- अनूपपुर)
अनूपपुर / भारत में रेल सुविधाओं में विस्तार जिस गति से हो रहा है ,उसी अनुपात में यात्रियों की सुरक्षा के लिये ऐहतियातन कदम उठाए जाने की जरुरत है। ट्रेनों के दुर्घटनाग्रस्त होने एवं चलती ट्रेन से गिरकर बडी संख्या मे प्रतिदिन लोगों की मौतें हो रही है। रेल लाईनों पर होने वाली दुर्घटनाएं बिल्कुल आम हो चुकी हैं। दशहरा के दिन रावण दहन का कार्यक्रम देखरहे आधा सैकडा से अधिक लोगों की दर्दनाक मौत ने दुनियाभर को न केवल हतप्रभ कर दिया बल्कि बडी लापरवाही की ओर ध्यानाकर्षण भी किया।
२९ नवम्बर को शहडोल रेलवे स्टेशन मे पं शंभूनाथ शुक्ल महाविद्यालय की बी एस सी द्वितीय वर्ष की छात्रा अमरकंटक निवासी सोनम गुप्ता की दर्दनाक मौत सभी को हिला देने वाली है। अमरकंटक के छोटकू प्रसाद गुप्ता की बेटी शहडोल में पढती है। बरौनी - गोंदिया ट्रेन से उसके मामा - मामी कहीं जा रहे थे। उनसे मिलने के लिये सोनम स्टेशन पहुंची व बोगी मे मिलने चली गयी। बतलाया जाता है कि ट्रेन चलने पर सोनम ने उतरने की कोशिश की तो सीधे ट्रेक मे चली गयी। उसके दोनो पैर कट गये। एक हाथ ,एक पैर तो कट कर शरीर से ही अलग हो गये। तुरन्त ट्रेन रोकी गयी। पूरा स्टेशन सोनम के करुण क्रंदन से स्तब्ध था। उसे जिला अस्पताल ले जाया गया,जहाँ प्रारंभिक उपचार के बाद बिलासपुर ले जाते समय रास्ते में उसका दुखद निधन हो गया।
ऐसी घटनाएं बिल्कुल आम हैं। समाज ,देश के लिये यह महज खबर हो सकती है। लेकिन जिस परिवार का सदस्य ऐसे हादसे का शिकार होता है उसके कष्ट, उसके दुखों की कल्पना करना तक कठिन है।
रेल विभाग उत्तरोत्तर प्रगति कर रहा है। तीसरी लाईन पडने के साथ बुलेट ट्रेन चलाने की तैयारी हो रही है। रेल सुविधाओं मे तेजी से विस्तार हुआ है। बहुत सी यात्री गाड़ियां एवं मालवाहक गाड़ियां प्रतिवर्ष बढाई जा रही हैं। रेल का आधुनिकीकरण भी हो रहा है।
इसी अनुपात मे यात्रियों की सुरक्षा के प्रबंध भी किया जाना चाहिये। हर साल ट्रेन दुर्घटनाओं मे हजारों लोग प्राण गंवा बैठते है। इसमे बडी संख्या रेल लाईन पार करते वक्त या चलती ट्रेन में चढने - उतरने के दॊरान होती है। ट्रेन चलती रहती है, यात्री दरवाजे खोल कर रोमांच का मजा लेने की कोशिश करते देखे जा सकते हैं। दरवाजों मे बैठ कर यात्रा करना बिल्कुल आम है। इसे रोकने की कोई कोशिश रेल विभाग नहीं करता । जबकि ट्रेन मे यात्रा करने वाले यात्रियों के जान - माल की सुरक्षा का दायित्व रेल विभाग का है। टिकट लेकर ट्रेन में बैठने से लेकर सुरक्षित यात्रा कर प्लेटफार्म से बाहर जाने तक की सुरक्षा रेल विभाग को देना चाहिए।
मैट्रो ट्रेन में यह सुविधा है कि बोगियों के दरवाजे ऑटोमैटिक ट्रेन चलने से पहले ही बन्द हो जाते हैं। चलती मैट्रो के दरवाजे नहीं खुल सकते। ऐसी ही व्यवस्था सभी यात्री ट्रेनों में किया जाना चाहिये। प्लेटफार्म से ट्रेन तभी छूट पाए ,जब सभी बोगियों के दरवाजे बन्द हो जाएं। स्टेशन में ट्रेन खडी होने पर ऑटोमैटिक दरवाजे खुल जाएं। चलती ट्रेन के दरवाजे बिना गार्ड या ड्राईवर या सुरक्षाकर्मी के न खुले। यह आवश्यक सुधार कर लेने पर दुर्घटनाएं कम होगी,यात्री सुरक्षित रहेगें । उनकी साथ चलती ट्रेन में डकैती, चोरी जैसी वारदात मे कमी आएगी। यह सुझाव मैंने रेल मंत्री, मंत्रालय, विभाग को भेजा है।देखते हैं कि देश की जीवन रेखा कही जाने वाली यह संस्था लोगों का जीवन सुरक्षित रखने के लिये क्या कदम उठाती है।
