कोतमा - एसईसीएल जमुना कोतमा क्षेत्र अन्तर्गत क्षेत्रीय चिकित्सालय भालूमाड़ा में अव्यवस्थाओं का भंडार लगा हुआ है आज स्वयं क्षेत्रीय चिकित्सालय की हालत बीमार जैसे हो गई है मरीज यहां आने से भी कतराते व डरते हैं कारण मात्र अस्पताल की चरमाराई हुई स्वास्थ्य अव्यवस्था। चिकित्सालय में डॉक्टरों की कॉफी कमी कई वर्षों से बनी हुई है जो अच्छे डॉक्टर चिकित्सालय पर पदस्थ उनका भी यहां से स्थानांतरण कर दिया गया स्थान तरण करने के बाद उन डॉक्टरों की कमी पूरी अब तक नहीं की गई ,विशेषज्ञ डॉक्टर नाम मात्र के यहां रह गए हैं और स्टाफ नर्स का कार्य भगवान भरोसे ही चलता हुआ नजर आता है मरीज तड़पते रहते हैं और स्टाफ नर्स मरीजों पर कम सोशल मीडिया व्हाट्सएप फेसबुक मोबाइल में व्यस्त स्टाफ रूम में देखी जा सकती हैं एसईसीएल कंपनी के कर्मचारियों को चोट लगने पर प्राथमिक इलाज के लिए लाया तो जाता है लेकिन उनके जीवन के साथ इलाज के नाम पर खिलवाड़ किया जाता है। यहां पर स्वास्थ्य व्यवस्था अन्य अस्पतालों के रेफर के सहारे चल रही है अस्पताल के इर्द-गिर्द गंदगी का आलम बना रहता है यहां स्वच्छता अभियान दूर-दूर तक नजर नहीं आता जबकि स्वच्छता अभियान के तहत लाखों करोड़ों रुपए कंपनियां व सरकार खर्चा कर रही है किंतु यहां के सीएमओ स्वच्छता अभियान पर फैली अव्यवस्थाओं पर चुप्पी साधे हुए हैं।
कमीशन के चक्कर में डाक्टर, चूस रहे हैं मरीजों को -
एसईसीएल क्षेत्रीय चिकित्सालय भालूमाड़ा का हाल बेहाल नजर आता है मरीजों को अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा वही दवाई लिखी जाती है जिसमें एम आर द्वारा अच्छा खासा कमीशन डॉक्टरों को मिलता है नाम मात्र की दवाइयां अस्पताल से मरीजों को मिलती हैं ज्यादातर दवाइयां आस पास के मेडिकल स्टोर से खरीदने की पर्ची थमा दी जाती है मजबूर होकर मरीज व उनका परिवार मेडिकल स्टोर से दवाई आज खरीद रहे हैं।अस्पताल के डॉक्टर मेडिकल स्टोर व एमआर से अच्छा खासा कमीशन पर्दे के पीछे रहकर वसूल कर रहे हैं। वहीं मरीजों को भोजन पोषण आहार देने का टेंडर ठेकेदार को दिया गया है ठेकेदार और अस्पताल प्रबंधन की मिलीभगत से मरीजों को मेनू व मापदंडों के अनुसार भोजन व पोषण आहार नहीं दिया जाता है।अस्पताल में भर्ती होने वाले कम्पनी के मजदूर मरीजों को मिलने वाले बेड,चादर,कंबल गंदे व मैले दिए जाते हैं वही अस्पताल पर भर्ती होने वाले मरीज यूनियन के नेताओं व वीआईपी लोगों को वीआईपी सुविधाएं प्रदान की जाती है।
अस्पताल के सामने बायो मेडिकल वेस्ट का अंबार-
एसईसीएल भालूमाड़ा अस्पताल के चंद कदमों की दूरी पर खुले में बायोमेडिकल वेस्ट फेंक दिया गया है जिसके कारण परिसर में विषाणुओं के प्रकोप बढऩे का खतरा बन गया है। जिस जगह पर बायो मेडिकल वेस्ट फेंका गया है उसी जगह पर 24 घंटे पालतू जानवरों का जमावड़ा लगा रहता है और छोटे छोटे ननिहाल बच्चे भी खेलने कूदने के लिए घूमते रहते है ऐसा लगता है दुर्घटनाओं के बाद ही हॉस्पिटल प्रबंधन इस ओर ध्यान देगा।
इंसीनेटर मशीन की एसईसीएल में नहीं व्यवस्था -
मशीन में जैसे ही सेनेटरी, नैपकिन,ग्लूकोज बोतल,सिरिंज,पट्टी,रूई जैसे अन्य बायो मेडिकल वेस्ट डाले जाते हैं तो यह उन्हें हाइजीनिक तरीके से जलाकर जीवाणु रहित राख में तब्दील कर देती है लेकिन भालूमाड़ा अस्पताल में कागजों पर ही इंसीनरेटर मशीन से कार्य बायो मेडिकल वेस्ट का कार्य हो रहा है जबकि दूर-दूर तक मशीन का उपयोग नहीं हो रहा है जिसके फल स्वरुप बायो मेडिकल वेस्ट फुले में फेंका जा रहा है जिससे बड़ी बीमारियां होने की आशंका रहती है।
स्प्रिट का भी टोटा रोना -
एसईसीएल भालूमाडा अस्पताल में रोजाना दुर्घटनाओं में घायल और आपरेशन होने वाले कई मरीज भर्ती होते भी हैं तो अस्पताल के ओटी से लेकर वार्ड तक में उपयोग आने वाली स्प्रिट की व्यवस्था तक नहीं है सिरिंज लगाने के बाद स्प्रिट रुई के साथ लगाने के बजाय रूई को गरम पानी में भिगोकर मरीजों पर मसला जा रहा है यहां तक कि मरीजों को लगने वाली चोटो पर प्राथमिक इलाज के दौरान पट्टी, मलहम व रूई तक की व्यवस्था की कमी का रोना रोया जाता है। ऐसी छोटी सी छोटी चीजों को लेकर स्वास्थ्य व्यवस्था पर जब प्रबंधन आज लापरवाही बरत रहा है तो सोचा जा सकता है कि लापरवाह प्रबंधन किस हद तक लापरवाही पर उतारू है।
कहना है-
बायो मेडिकल वेस्ट यदि अस्पताल के सामने खुले में फेंका गया है तथा स्प्रिट की व्यवस्था नहीं है अस्पताल में अन्य अव्यवस्थाओं को मैं दिखवाता हूं।
यू. एस. सौठे
सी.एम.ओ. ,क्षेत्रीय चिकित्सालय जमुना कोतमा क्षेत्र भालूमाडा़