⚡ ब्रेकिंग News

एसईसीएल मजदूरों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहा,क्षेत्रीय चिकित्सालय

भालूमाड़ा -कोई भी चिकित्सालय मानव समाज के लिए मंदिर और डॉक्टर भगवान स्वरुप होता है भौतिकवादी  जीवन दृष्टिकोण और व्यक्तिगत लाभ ने चिकित्सक को मानवता से दूर कर दिया है वर्तमान समय मे समाज मे कुछ को एक व्यवसायी के नजरिये से देखा जा सकता है।सरकारी संस्थान के चिकित्सक नियम कायदे से बंधे  होते हैं ज़िनका पालन अनिवार्य होता है l  

डॉक्टर साहब की मनमानी पर आखिर कौन देगा ध्यान-

एस ई सी एल कंपनी के कुछ डॉक्टरों पर कोई नियम कायदा लागू नही होता अथवा जानबूझकर पालन नही किया जाता है।सूत्रों की माने तो क्षेत्रीय चिकित्सालय ज़मुना कोतमा क्षेत्र,भालूमाड़ा एसईसीएल मे पदस्थ एक चिकित्सक ड्यूटी मे रहते हुये घर मे निजी प्रैक्टिस करता है रात पाली की ड्यूटी मे रात भर छुपकर एक कमरे मे सोते है।

 जमकर चल रहा,कमीशन का खेल-

सूत्र तो यह तक बताते हैं कि एम आर मेडिकल स्टोर से डाक्टर साहब का कमीशन बंधा हुआ है और कमीशन के चक्कर मे बाहर की इतनी दवाई डाक्टर साहब लिखते है कि मरीज आर्थिक रुप से तंग  हो जाता है वहीं दूसरी ओर विटामिन आदि का भुगतान भी कंपनी नही करती है  कंपनी के बाहर के रोगी को इतनी महंगी और अनुपयोगी दवाई लिखी जाती है ज़िससे मरीज अपना उपचार भी नही करा पाते और मरीज की जेब जब खाली हो जाता है तब उसे उपचार हेतु बाहर भेज दिया जाता है।

जिम्मेदार अधिकारी ही नहीं दे रहे ध्यान -
  
सूत्रों की माने तो क्षेत्रीय चिकित्सालय से सही समय मे सही जगह उपचार हेतु नही भेजा जाता है,बहाना यह होता है कि हायर सेंटर भेजने के लिए मै कुछ नही कर सकता। जानकारों की मानें तो पी एम ई कोल माइंस रूल 1955 के रूल के तहत उसके नियमानुसार होना चाहिये किंतु पूरी जांच किये बिना औपचारिकता किया जाता है आँख रोग का कोई विशेषज्ञ नही होने के बाद भी सभी रोगी की दृष्टि  6/6 लिखा जाता है एवं बकायदा चिकित्सक द्वारा हस्ताक्षर कर प्रामाणित  किया जाता है यदि चिकित्सालय मे डॉक्टर नही है तो रोगी को या तो अन्य चिकित्सालय जांच हेतु भेजा जाना चाहिये अथवा चिकित्सक को कहीं से बुलाना चाहिये। वहीं ड्रायवर या डम्पर आॅपरेटर ज़िनका प्रतिवर्ष आँख जांच किया जाना अनिवार्य है और इस तरह की जांच के बाद कोई दुर्घटना होता है तब सी एम  एस को पूरा दोषी माना जाता है l 

पौष्टिक आहार देने के नाम पर भी खिलवाड़-
 
सूत्रों की माने तो क्षेत्रीय चिकित्सालय मे भर्ती मरीजों को सम्पूर्ण पौष्टिक आहार  नही उपलब्ध कारवाया जाता है l  कुछ रोगियों को उच्च प्रोटीन  आहार दिया जाना अनिवार्य होता है किंतु कागजी खाना पूर्ती किया जा रहा है चिकित्सालय मे भर्ती सभी रोगी चिकित्सालय का भोजन नही खाते हैं व स्वयं  के घर से भोजन मांगवाते हैं फिर भी उनके नाम पर व्यय  होना दर्शाया जाता है ज़िससे कंपनी को आर्थिक क्षति मिलीभगत  से जानबूझकर पहुचाया जाता है।

वर्षों से एक ही जगह पर पदस्थ लिपिक-

 वर्षों से एक ही जगह पर पदस्थ लिपिक की मिलीभगत से या पूरा खेल चिकित्सालय में खेला जाता है और उच्च अधिकारी भी इस ओर ध्यान देने की जगह आंखो में पट्टी बांधे हुए हैं। जिसमे लिपिक की भूमिका संदिग्ध प्रतीत होती है जबकी तीन वर्ष मे तबादला कर दिया जाना चाहिये।

खुले में फेंक रहे हैं बायो मेडिकल वेस्ट-
किसी भी चिकित्सालय के लिये सबसे महत्त्वपूर्ण कार्य होता है बायोमेडिकल वेस्ट(कचरा) का उपचार /निपटारा कैसे हो इसके लिए 1998 मे एक कानून बनाया गया बाद मे दूसरा कानून  बायोमेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट 2016 लाया गया,ज़िसमे नियम कानून बताये गये की कैसे बायोमेडिकल वेस्ट का निपटारा किया जाय किंतु क्षेत्रीय चिकित्सालय मे पदस्थ सी एम एस को इससे कोई परवाह नही तभी तो हास्पिटल के सामने खाली जगह पर बायोमेडिकल वेस्ट को खुले आम फेक दिया जाता है।

वही जब इन सभी बिंदुओं पर क्षेत्रीय चिकित्सालय के सीएमओ यू एस सौठे से बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने कुछ बिंदुओं का ही जवाब देकर फोन काट दिया।


कहना है -

सब डॉक्टर इतना कर लेते हैं उपचार के दौरान अगर कोई फाल्ट पाया जाता है दो ही बाहर रेफर करते हैं।

यू. एस. सौठे
सी.एम.ओ.,क्षेत्रीय चिकित्सालय जमुना कोतमा क्षेत्र भालूमाडा़
Previous Post Next Post
BREAKING NEWS : Loading...

ताज़ा खबरें

राजनीति समाचार
राजनीति समाचार लोड हो रहे हैं...