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सरकार के वादों से आज भी दूर है '' बैगा'' समुदाय का ये गांव,मूलभूत सुविधाओं के बिना जीने को है मजबूर

अनूपपुर - सरकार भले ही आदिवासियों के विकास के लाख दावे करती हो लेकिन आज भी आदिवासियों के ऐसे गांव है जहां पर विकास पहुंचा ही नहीं है,और जमीनी स्तर पर देखा जाए तो विकास के सभी दावों की पोल खुलती हुई नजर आती हैं।आज भी कुछ ऐसी जगह है जहां पर लोग 50 वर्षो से भी अधिक बिना मूलभूत सुविधाओं के रहने को मजबूर हैं।सरकार ने भले ही आदिवासियों को साधने के लिए कई घोषणाएं की हो लेकिन आज भी बैगा जनजाति के लोग मूलभूत सुविधाओं के बिना ही अपना जीवन यापन करने को मजबूर हैं। हम बात कर रहे हैं अनूपपुर जिले के अनूपपुर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत धुरवासिन के ग्राम जिनवानी टोला की। ग्राम पंचायत धुरवासिन अंतर्गत आने वाले जिनवानी टोला में सिर्फ बैगा जनजाति के लोग निवासरत है जो कि मूलभूत सुविधाओं से कोसो दूर है।या फिर यह कहा जाए कि यहां विकास की उल्टी गंगा बह रही है जिस ओर कोई ध्यान देने वाला नही है।और अगर इन बैगा जनजाति के लोगो का ध्यान जनप्रतिनिधियों व नेताओ को आता भी है तो वह सिर्फ और सिर्फ चुनाव के समय।ग्रामीणों ने चर्चा के दौरान बताया कि हमारे गांव में नेता आते तो है लेकिन सिर्फ चुनाव के समय वोट मांगने।


150 से अधिक बैगा जनजाति के लोग मूलभूत सुविधाओ का कर रहे इंतजार -

आपको बता दें की आजादी के बाद से आज वर्तमान की स्थिति तक अनूपपुर जिला कितना विकसित हुआ है,या यह कहा जाए की विकास की आधार सिला सिर्फ कागजो मे सिमट कर रह गई है।हमे पता चला जब हमारे संवाददाता जमीनी स्तर पर कवरेज करने पहुंचे।तो वहां देखा कि ग्राम पंचायत धुरवासीन अंर्तगत जिनवानी टोला मे लगभग 150 लोग जो निवासरत है जो कि बैगा जनजाति के लोग हैं।अनूपपुर विधानसभा क्षेत्र का यह गांव जहा कई वर्षो से बैगा जनजाति निवास कर रही है।गांव की आबादी लगभग 150 है और मकानो की संख्या लगभग 30 की है। जहां पर मूलभूत सुविधाओ का कोई नामो निशान नहीं है। इस गाँव से विकास भी कोशो दूर नजर आता है यहां न चलने के लिए सड़क है और न इलाज कराने के लिए कोई अस्पताल,अगर शिक्षा की बात की जाए तो स्कूल काफी दूर होने के कारण बच्चो ने स्कूल जाना भी छोड़ दिया है।और आवागमन का कोई मार्ग नहीं है। बैगा जनजाति के यह लोग प्रतिदिन मजदूरी करने से लेकर अन्य कार्य के लिए लगभग 3 से 4 किलो मीटर का सफर जिनवानी टोला से मुख्य मार्ग तक जाने के लिए कच्चे मार्ग से आना जाना करते है।इस गांव में सड़क आज तक नही बन पाई है जिसके कारण इस गांव के लोगो को रेलवे की पटरी से गुजर कर जाना होता है।

नही मिलता पीने के लिए शुद्ध पानी -

 ग्राम पंचायत धुरवासीन अंर्तगत जिनवानी टोला में निवासरत लोगो के पास नल जल योजना आज तक नहीं पहुंची पेयजल की व्यवस्था के लिए लगभग 1 किलो मीटर की दूरी तय करना पड़ता है और नदी से पानी लाने के लिए हर दिन यह चलता रहता है।अब सवाल यह उठता है की नल जल योजना आज तक पहुंची क्यों नहीं।वर्तमान की स्थिति तक किसी भी अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने कोशिश ही नहीं की या वजह कुछ और थी। यहां पर निवासरत लोगो को पीने के लिए शुद्ध पानी तक नहीं मिल पाता और लोग मजबूरी में गंदा पानी पीते हैं,जिसके कारण लोगो को कई तरह की बीमारियों का सामना करना पड़ता है।


गांव से स्कूल दूर होने की वजह से बच्चो ने छोड़ी पढ़ाई -

जब ग्रामीणों से बात की गई तो उन्होंने बताया की खर्रा टोला का विद्यालय गांव से 4 किलोमीटर दूर है,जब इस गाँव से कोई बच्चों को लेकर जाता है। तभी अध्ययन हो सकता है,पिछले कई महीनों से बच्चे विद्यालय नहीं जा रहे है,हमारे गाँव मे आंगनबाडी भी नहीं है।गांव में ही रहने वाली चरकी बैगा पास के स्कूल में खाना बनाने का काम करने जाती थी तब वह बच्चो को अपने साथ ले जाती थी लेकिन चरकी बाई को स्कूल प्रबंधन द्वारा बिना पैसा दिए ही काम में आने से मना कर दिया गया।तो अब न चरकी बैगा स्कूल में काम करने जाती हैं और न ही इस गांव के बच्चे स्कूल जाते हैं।


स्वास्थ्य सुविधाओ को मोहताज है बैगा समुदाय -

ग्राम पंचायत धुरवासिन अंर्तगत जिनवानी टोला में निवासरत लोगो को स्वास्थ्य सुविधाएं मिलने की बात की जाए तो यहां पर कोई भी अस्पताल नही है,अगर किसी मरीज को ले जाना होता है तो गांव वालो को मरीज को कंधे मे लादकर ले जाना पड़ता है क्योंकि सड़क न होने की वजह से वाहन का आना जाना नहीं हो पाता है। और रेलवे की पटरी को पार कर के जाना पड़ता है बहुत पहले एक अंडर ब्रिज था वह भी कई दिनों से बंद पड़ा हुआ है जिस पर कोई ध्यान नहीं देता।इस गांव में निवासरत लोग बीमार पड़ते हैं तो उन्हें प्राथमिक इलाज तक नहीं नसीब हो पाता।और लगभग 150 बैगा समुदाय के लोगो को बिना स्वास्थ्य सुविधाओ के ही अपना जीवन यापन करना पड़ रहा है।


कहना है -

मैं यहां अपने दादा के जमाने के समय से ही निवासरत हूं, यहां पर हमे किसी भी प्रकार की कोई सुविधा नहीं मिलती।
दयाराम बैगा,ग्रामीण

कहना है -

मैं पहले स्कूल में खाना बनाने का काम करने के लिए स्कूल जाती थी तो गांव के बच्चो को साथ ले जाती हूं पर स्कूल प्रबंधन द्वारा मेरा वेतन नहीं दिया जाता था तो मैंने स्कूल छोड़ दिया जिस वजह से अब गांव के बच्चे भी स्कूल नही जाते हैं। और हम लोगो को डर भी लगता है कि कही कोई अनहोनी न हो जाए क्योंकि स्कूल जाने के लिए रेलवे की पटरी पार कर के जाना पड़ता है।
चरकी बैगा, ग्रामीण

कहना है -

हम लोगो ने अपनी परेशानियां बहुत बार जनप्रतिनिधियों को बताई है लेकिन कोई ध्यान ही नही देता।
संजू बैगा, ग्रामीण

कहना है -

हम लोगो को कोई भी सुविधा नहीं मिल पाती,बच्चो को अगर कोई लेकर जाता है तो स्कूल चले जाते हैं वरना नही जाते हैं,सबसे ज्यादा हम लोगो को पीने के पानी की दिक्कत होती है।
रामरतीय बैगा, ग्रामीण

कहना है -

हम लोगो को पानी रोजाना नदी से ही लाना पड़ता है और हम पीने के लिए भी नदी का पानी ही उपयोग करते हैं,नदी भी हमारे गांव से लगभग 1 कि. मी. की दूरी पर है।
पार्वती बैगा, ग्रामीण

कहना है -

हमारे गांव में न ही सड़के है और न ही कोई अस्पताल,अगर कोई बीमार पड़ जाता है और चलने की स्तिथि में न हो तो उसे कंधे में लेकर आना पड़ता है क्योंकि गांव में सड़क नही है तो गाड़ी भी नही आ पाती।
बैसू बैगा, ग्रामीण

कहना है -

जब इस संबंध में ग्राम पंचायत के सरपंच से बात करनी चाही गई तो सरपंच ने यह कह दिया कि मेरे पास 1 मिनट का समय नही है,मैं अभी बहुत व्यस्त हूं।

कहना है -

हमारे द्वारा सड़क बनवाने का प्रयास किया जा रहा है और पानी के लिए पाइप लाइन बिछाने के लिए भी कोशिश की गई लेकिन सड़क न होने की वजह से गाड़ी वहा तक नही पहुंच पाती,फिर भी मैं पुनः प्रयास करता हूं।

विजय तिवारी,सचिव,ग्राम पंचायत धुरवासिन
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