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क्या लड़की होने से छीन जायेगा स्कूल में अपनी पसंद का विषय चुनने का अधिकार?

क्या ऐसे ही साकार होगा सरकार का बेटी पढ़ाओ बेटी बढ़ाओ का सपना,कला समूह में छात्राओं को प्रवेश न देना भेदभाव नहीं तो क्या है- एडवोकेट सुषमा कैथल 
अनूपपुर / हिमांशू पासी– शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले स्कूलो में आये दिन विधार्थियो पर अत्याचार की खबरे सामने आती रहती है फिर चाहे वह शिक्षक की प्रताड़ना का मामला हो या फिर शिक्षको की डांट फटकार से बर्तन धुलने, झाड़ू लगाने का मामला हो और हर मामले की जानकारी सम्बंधित विभाग के उच्च अधिकारियो शिकयाते भी की जाती है,लेकिन जिम्मेदारो द्वारा यह कह कर मामले को टाल दिया जाता है कि अभी हम उक्त मामले की जांच करेंगे।और बात की जाए मानव जीवन की तो ऐसा कहना गलत नही होगा की जीवन में शिक्षा नहीं है तो जीवन व्यर्थ है। शिक्षा के बिना हम जीवन में कुछ नहीं कर सकते। शिक्षा के अभाव में हम अपने समाज में होने वाली बुराइयों का सामना नहीं कर सकते। आज की महिलाएं चांद तक पहुंच गई है और पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर देश की आर्थिक गतिविधियों में अपनी भागीदारी निभा रही हैं।आज भी कई गाँवो,क्षेत्रों में लड़कियों का शिक्षा का स्तर काफी नीचे है जो कि बेहद चिंताजनक है।

संवैधानिक मूल्यों का हो रहा हनन -


भारत का संविधान विश्व के सर्वोत्तम संविधानों में से एक है। और हमारे देश का संविधान देश में रह रहे सभी नागरिको को समानता का अधिकार देता है लेकिन क्या जमीनी स्तर में सभी लोगो को समानता का अधिकार मिल रहा है या नहीं यह तो जमीनी स्तर पर काम कर रहे लोगो को ही मालूम पड़ता है। अगर शिक्षा के मंदिर में शिक्षा देने वाले शिक्षक ही विधार्थियो के साथ भेदभाव करने लगे तो फिर संवैधानिक मूल्यों का पालन कौन और कैसे कराएगा?अगर स्कूल में सिर्फ लड़की होने की वज़ह से उन्हें उनकी पसंद का विषय चुनने का अधिकार छीन लिया जाए तो यह भारत के संविधान द्वारा दिए गए संवैधानिक मूल्यों का हनन नहीं तो फिर क्या है?क्या यह शिक्षा के अधिकार का हनन नहीं?क्या यह लिंग भेदभाव नहीं?

लडकियों को नहीं दिया जाता कला समूह में प्रवेश -


अगर लड़की होने की वज़ह से उनसे उनकी पसंद का विषय चुनने का अधिकार छीन लिया जाये तो यह उन लोगो के मुह पर तमाचा होगा जो नारी सम्मान की बात करते है और यही से सरकार के बेटी पढ़ाओ बेटी पढ़ाओ के सारे दावों की पोल खुलती हुई भी नजर आती है।हम बात कर रहे है अनुपपुर जिले के कोतमा शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की जहा पर लडकियों को उनकी पसंद का विषय सिर्फ इसलिए नहीं दिया जाता क्योंकि वो लड़की है और यह हम नहीं कहते यह उस स्कूल में प्रवेश के आंकड़े देखने से ही पता चलता है।सोशल वर्कर अधिवक्ता सुषमा कैथल एवं पत्रकार हिमांशू पासी को जानकारी मिली कि कोतमा के शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में लडकियों को 10वी पास होने के बाद कक्षा 11 वी में कला समूह में प्रवेश नहीं दिया जाता।जिसकी जमीनी हकीकत जानने के लिए जब सोशल वर्कर अधिवक्ता सुषमा कैथल एवं पत्रकार हिमांशू पासी उक्त स्कूल पहुंचे और वहां से आंकड़े लिए कि कक्षा 11वी एवं 12 वी कक्षा में इस शैक्षणिक सत्र 2023-24 में कितने छात्र-छात्राओ को प्रवेश दिया गया जब इसके आंकड़े सामने आये तो आंकड़े चौकाने वाले थे।क्योंकि कक्षा 11वी में कला समूह में 92 छात्र और छात्राओ की संख्या 00 थी और इसी तरह से कक्षा 12 वी में कला समूह में 44 छात्र और छात्राओ की संख्या 00 थी शिक्षको से जब उक्त आंकड़ो पर बात की गयी कि यह पर छात्राओं को कला समूह में प्रवेश क्यों नहीं दिया जाता तब शिक्षक ने बताया कि बच्चियां आर्ट्स लेने की इच्छुक नहीं होती वहीं कुछ टीचर ने जवाब दिया की यहां आर्ट्स विषय बच्चियों को दिया ही नहीं जाता, पास ही बैठे एक टीचर का जवाब आता है बच्चे बेहूदा होते हैं लोअर क्लास है इसलिए एडमिशन दिया ही नहीं जाता।इस तरह के जवाब के जब सोशल वर्कर सुषमा कैथल एवं पत्रकार हिमांशू पासी द्वारा सवाल किया गया की क्या यह बच्चियों के शिक्षा के अधिकार का हनन नहीं है? क्या यहां पर लिंग भेदभाव नहीं हो रहा है? किस अधिकार से आप उन बच्चियों को शिक्षा के अधिकार से वंचित कर रहे हैं क्या आपके पास कोई ऐसा नियम आया है कि सिर्फ कला समूह में ही छात्राओ को एडमिशन नहीं देना है इन सारे सवालों पर टीचर्स अलग-अलग प्रकार से जवाब देने लगे यह कहते हुए की बच्चियों इंटरेस्टेड नहीं होती है आर्ट्स विषय लेने में।जो बच्चे आर्ट्स लेते हैं उनको हम शासकीय कन्या विद्यालय,कोतमा में प्रवेश दिलवा देते हैं आर्ट्स विषय के अलावा अन्य सभी विषयों में बच्चियां हैं। वहीं दूसरी तरफ शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कोतमा में जब वहां के प्रिंसिपल से बात की गई तो जानकारी दिया कि ऐसा कोई सेटलमेंट यहां नहीं होता है वहां की कोई भी बच्चियां यहां नहीं भेजी जाती साथ ही कन्या स्कूल कोतमा से जानकारी मिली कि सबसे अधिक छात्राएं आर्ट्स विषय में ही हैं कक्षा ग्यारहवीं में 61 और कक्षा 12वीं में 65 बच्चियां अध्ययनरत हैं।अब देखना होगा कि इस मामले को उच्च अधिकारी कितनी गंभीरता से लेते हुए संज्ञान में लेते हैं और दोषियों पर कब कार्यवाही होती है।

कहना है -

आपके द्वारा मामले को संज्ञान में लाया गया है मैं उक्त मामले को दिखवाता हूं और अगले शैक्षणिक सत्र में बच्चियों का प्रवेश भी कला समूह में लिया जाएगा।

टी.आर.आर्मो
जिला शिक्षा अधिकारी,अनूपपुर
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