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ग्राम पंचायत गोहन्ड्रा का हाल बेहाल,सरपंच चहुमुखी विकास करने के दावे को लेकर लूट रहे वाहवाही !

कोतमा - बिना भेदभाव समान विकास कार्य करने का सरकार का दावा कारगर साबित नहीं हो पा रहा है। जिले में कई ऐसे गांव हैं, जहां आज तक मुख्य रास्तों का निर्माण नहीं हो पाया है। ऐसी ही एक ग्राम पंचायत गोहन्ड्रा है जहा आज भी लोग सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। सरकार को ये गांव केवल मतदान के समय याद आते हैं। चुनावों में बड़े-बड़े वादे करने के बाद पांच साल यहां कोई झांकता भी नहीं है। फिलहाल गांव के रास्ते कीचड़ से लबालब हैं। हालात यह हैं कि डेढ़ किलोमीटर लंबे मुख्य रास्ते से वाहन तो छोड़ो पैदल निकलना भी मुश्किल हो रहा है। रास्तों की हालत खराब होने के कारण अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेज पाने में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।

गांव के सड़को की हालत गंभीर - 

हर साल बारिश के मौसम में ग्राम पंचायत गोहन्ड्रा की सड़को में पानी भर जाता है। ऐसा प्रतीत होता है कि प्रशासन और ग्राम पंचायत के सरपंच ने गांव के विकास के लिए कोई प्रयास नहीं किया।आज तक कोई भी सरकार यहां पर सही ढंग से रास्तों का निर्माण नही करा पाई है।गांव के जनप्रतिनिधियों द्वारा चुनाव के समय गांव के विकास को लेकर बड़े बड़े वादे तो किए गए थे लेकिन अब वह सब वादे ठंडे बस्ते में डाल दिए गए हैं।जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का खामियाजा ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।ग्रामीण कई बार कीचड़ से भरी सड़को से निकलते समय गिरकर चोटिल भी हो जाते हैं जिसे देखने सुनने वाला कोई नहीं है।

आमजनों को आने जाने में होती है परेशानी -

ग्राम पंचायत गोहन्ड्रा में सड़को का निर्माण तो किया गया लेकिन उसकी देखरेख में कही न कही कमी रह गई जिसकी वजह से आज गांव में प्रवेश करने वाले रास्ते में ही पानी भरा रहता है और ग्रामीणों को आने जाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।पिछले कई दिनों से हो रही बारिश के कारण मुख्य रास्ता कीचड़ से लबालब हो गया। इसके अलावा गांव में रास्तों में जलभराव की समस्या बनी हुई है। मुख्य रास्ते से बाइक व कार नहीं निकल सकती है। ट्रैक्टर को निकालने पर कई जगह ज्यादा गड्ढे होने के कारण फंस जाता है। जो बच्चे निजी स्कूल में पढ़ते हैं, उनकी बस भी केवल पक्के रास्ते तक ही आती है,जिससे बच्चे स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं।गांव के रास्ते की हालत बहुत खराब है। 

कहना है -

जब इस संबंध में ग्राम पंचायत गोहन्ड्रा के सरपंच सूरज अगरिया से फोन के माध्यम से बात करनी चाही तो हमेशा की तरह उन्होंने फोन उठाना उचित नहीं समझा।
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