बिजुरी/कमलेश मिश्रा/ब्राह्मण मतदाताओ व नेताओ की उपेक्षा भाजपा को पडेगा मंहगा-राम जी शास्त्री



बिजुरी- भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष राम जी शास्त्री ने कहा कि  कोतमा क्षेत्र जहाँ सबसे ज्यादा ब्राह्मण मतदाता है लेकिन भाजपा  ने यहाँ कभी भी ब्राह्मण मतदाताओ तथा नेताओ को बढने नहीं दिया बल्कि उनका उपयोग कर सत्ता पर काबिज होने का लालच ही कोतमा क्षेत्र में भाजपा की लुटिया डुबोयेगा
भारतीय जनता पार्टी जिसका अनूपपुर जिले का प्रमुख केंद्र कोतमा विधानसभा क्षेत्र को ही माना जाता है और यहाँ से भाजपा में सैकडो ब्राह्मण नेता पार्टी का प्रतिनिधित्व तथा उसके लिए दिन-रात मेहनत करते है लेकिन जब कभी भी किसी चुनाव के समय वही नेता पार्टी पधाधिकारियो को आस भरी नजरो से देखते है तो हर बार उन्हें निराशा ही हाथ लगती है पार्टी कर्तव्यो के निर्वहन में भले ही भाजपा में कोतमा, बिजुरी तथा राजनगर से सैकडो ब्राह्मण नेता लगे हो लेकिन चुनाव में टिकट देते समय प्रत्येक बार पार्टी ने इस समाज की उपेक्षा ही की है सामान्य सीट होने के बावजूद न तो विधानसभा चुनाव में उन्हें कोई मौका दिया जाता है और न ही जिला तथा जनपद सदस्य के चुनाव में उनकी पूछ परख होती है पार्टी के इस रवैये के कारण ही आज कोतमा विधानसभा क्षेत्र जहाँ भाजपा हमेशा सशक्त रहती थी वहां अब पार्टी का जनाधार खोता जा रहा है पार्टी के वरिष्ठ नेताओ जिन्होंने सालो से पार्टी के कार्यो को निष्ठापूर्वक निभाया उन्हें दरकिनार कर पार्टी ने अपनी मनमानी करते हुए नए चेहरे को लोगो के सामने रख देती है यदि अब भी पार्टी ब्राह्मण नेताओ व मतदाताओ की उपेक्षा जारी रखेगी तो वह दिन दूर नहीं जब भाजपा कोतमा क्षेत्र से पूरी तरह से पराजित हो जाएगी

नपा से लेकर विधानसभा में उपेक्षा 
कोतमा विधानसभा अंतर्गत भारतीय जनता पार्टी में सबसे ज्यादा ब्राह्मण नेता विभिन्न दायित्वों का निर्वहन कर रहे है लेकिन सालो साल पार्टी की सेवा करने के बाद भी जब कभी चुनाव में सामान्य सीट होने पर इन नेताओ ने पार्टी से टिकट की मांग की तो पार्टी की तरफ से उन्हें उपेक्षित ही होना पडा विधानसभा चुनाव में पार्टी ने हार का सामना किया इसके बाद जिला पंचायत में भी यही सिलसिला जारी है और दोनों ही चुनाव में पार्टी ने किसी ब्राह्मण चेहरे पर भरोसा नहीं जताया ।

जातिगत समीकरण भी पक्ष में दृ
विधानसभा चुनाव हो या जिला पंचायत चुनाव ब्राह्मण प्रत्याशी के लिए यहाँ हमेशा ही जातिगत समीकरण उसके पक्ष में रहे है क्योकि यही वह विधानसभा है जहा सर्वाधिक मतदाता ब्राह्मण समाज के है फिर भी पार्टी के जिले तथा संभाग के नेताओ ने किसी भी ब्राह्मण नेता को बढने नहीं दिया बल्कि जब भी उसे प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला पार्टी नेताओ ने टांग खींचते हुए उन्हें टिकट ही नहीं दिया । यदि यही हालात रहे ब्राहमन समाज अन्य पार्टीयो का भी रूख कर सकते है जो पार्टी हित मे न होगा ।
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