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खानों मे श्रमिकों की सुरक्षा कागजों और बैठक तक सीमित





कंपनी स्तर से नही हो रही कार्यवाही, 8 अक्टूबर 2018  को एस ई सी एल जमुना कोतमा क्षेत्र के व्ही आई पी गेस्ट हाउस पर खान सुरक्षा बोर्ड के सदस्यों की बैठक।

कोतमा /एस.ई.सी.एल. में खानों और श्रामिकों की सुरक्षा कि स्थिती इतनी दयनीय है कि कभी-कभी एेसा प्रतीत होता है कि खान  सुरक्षा के नाम पर जितने भी फोरम और विभाग की स्थापना किया गया है सिर्फ कागजी औपचारिकता कि पूर्ति के लिये है l फिर क्यो कंपनी खान सुरक्षा के नाम पर बैठक और निरीक्षण कर पैसे का फिजूल खर्चा कर रही है l कंपनी के सभी क्षेत्रों का लगभग स्थिती यही है कि श्रमिकों को मूलभूत आवश्यक सुरक्षा उपकरण गमबूट प्रबंधन उपलब्ध नही करा पा रही है l कोयला मजदूर अपने पैसे से डी.जी. एम.एस.से वगैर स्वीकृत गमबूट पहन कर खानों मे काम कर रहे हैँ l प्रबंधन उनको कैसे खान मे काम करने की अनुमति प्रदान करता है l लाइटवेट कैपलैंप की मांग कर्मचारियों द्वारा कई वर्ष से किया जा रहा है l जो आज तक नही मिल पाया है l क्षेत्रीय स्तर से लेकर कोल इंडिया  तक सुरक्षा के सभी फोरम में मांग किये जाने के बाद भी नतीजा शून्य रहा l तब क्यो खान सुरक्षा बोर्ड और समिति बनाया गया है एवं फिर क्यो बैठक, निरीक्षण तथा सुरक्षा पखवाडा के नाम पर करोडों रूपये का अपव्यय किया जा रहा है l सिविल कार्यों के लिये कंपनी मे फंड की कोई कमी नही होती है परंतु जहाँ सीधे श्रमिक की सुरक्षा का मामला है वहां सिर्फ कागजी कार्यवाही तक सब सीमित हो जाता है, पचासो तकनीकी समस्यायों का उल्लेख किया जाता हैl  खानों मे आज भी पानी पीने लायक नहीं है l कर्मचारी पीलिया-टाईफाइड से बीमार हो रहा है l प्रत्येक क्षेत्र में  लाखों के  आर.ओ.,ऐक्वागार्ड पानी शुद्धिकरण यन्त्र खरीदे गये, कई गायब हो गये और बांकी खराब पडे हैँ l श्रामिकों को सही और पर्याप्त टूल्स काम के लिये प्रबंधन दे नही पाता है, फिर सुरक्षा और सुरक्षा बैठक क्या मायना रखता है l कंपनी खान सुरक्षा बोर्ड जब क्षेत्र मे आये, किसी खान का निरीक्षण करें, सच्चाई को कागजों मे भी जाहिर करें तब तो बैठक सार्थक होगा l क्योंकि अधिकांश भूमिगत खानों में स्वच्छ हवा और पानी नही है l पी एम ई का उद्देश्य कर्मचारियों के अच्छे स्वास्थ्य की निगरानी रखना होता हैl यहाँ कंपनी मे पी एम ई के कुछ दिन बाद कर्मचारी को ह्रदय रोग लकवा कैंसर हो जाता है l पी एम ई का जांच भी केवल डी जी एम एस के नियम से बंधे होने की मजबूरी हैl क्षेत्रीय स्तर के अधिकारियों को रोज श्रमिकों की समस्या से शर्मिन्दा होना पड़ता है,क्योंकि श्रमिक कहता कि मुझसे काम लेना है तो मुझे सुरक्षा उपकरण,साफ पीने का पानी,स्वच्छ पर्याप्त हवा आदि चाहिये अन्यथा आप प्रबंधन के पद पर क्यो बैठे हैं l श्रामिकों की बात पर सत्यता भी है l वास्तव मे खान सुरक्षा से सम्बंधित कोई भी निरीक्षण,बैठक और पखवाड़े का सार्थक औचित्य तभी है जब श्रामिकों की पूर्ण सुरक्षा सन्निहित हो l
दिनांक 08 अक्टू को इस बार एसईसीएल कंपनी स्तर की त्रिपक्षीय सुरक्षा बैठक ज़मुना कोतमा क्षेत्र के व्ही आई पी गेस्ट हाउस मे होना तय हुआ है,इस पत्र के माध्यम से क्षेत्र के श्रमिकों ने वास्तव में खान सुरक्षा के उद्देश्य को चारितार्थ करने की मांग प्रबंधन और खान सुरक्षा बोर्ड के सदस्यों से किया है l
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