
नेशनल हाईवे सड़क मार्ग का फर्जीवाड़ा कर , करोड़ो का मुआबजा
296 खसरा न. शासकीय वन भूमि को,साहब ने अशीन एवं अन्य व्यक्तियों को खसरा न. 296 में बटंक बढ़ाकर करोडो़ रूपये फर्जी तरीके से किया मुआवजा वितरण कर दिया गया ,मामले की जांच चल रही कछुआ की चाल।
कोतमा-कोतमा तहसील में कम्प्यूटर से फर्जीवाड़ा करके कैसे गैर हकदार की शासकीय भूमि को आनन फानन में कूटरचित दस्तावेज तैयार करा कर शासकीय भूमि का नामांतरण कर भू स्वामी बना दिया जाता है फर्जीवाड़े के नए नए अध्यय कोतमा तहसील के अधिकारियों, आर आई,पटवारियों द्वारा, यहाँ तक कि कोतमा तहसील में कई ऐसे मामले वर्तमान में शिकायत के बाद प्रकाशन में आये किसी गरीब के पट्टे की भूमि को कंप्यूटर से छेड़छाड़ करके फर्जी दस्तावेज कूट रचना करते हुए अधिकारियों ने भू-माफिया के नाम जमीन को स्थानन्तरण व पट्टा तक जारी कर दिया जा रहा है शासकीय जमीनों पर कब्जा करना आम बात हो गई है पहले राजस्व अधिकारी व कर्मचारी शासकीय जमीनो पर कब्जा करवाते हैं और दूसरी ओर कुछ दिनों उपरांत शासकीय जमीनो ओर खसरे का रकवा व बटंक बढ़ा कर उस शासकीय जमीन का कब्जाधारी दिखा कर भू माफिया को करोड़ों की शासकीय जमीनों का कब्जा व पट्टा बना कर दे दिया जाता है।अनूपपुर जिले की कोतमा तहसील में शासकीय जमीन व पट्टा धारी पुस्तैनी,गरीब व अशिक्षित लोगो की भूमियो में जमकर हेराफेरी की जा रही है कूटरचित फर्जी दस्तावेज कोतमा तहसील में आनन फानन में कुछ पैसे खर्चे करने के उपरांत आसानी से मिल जाते हैं गरीब अपनी जमीन व इंसाफ पाने के लिए राजस्व अधिकारियों,आर आई,पटवारी कार्यालय के चक्कर लगाते देखे जा सकते हैं।जमीन फर्जीवाड़े का खेल भू माफिया राजस्व अधिकारी व राजस्व कर्मचारियों की साँठ गाठ से कई वर्षों से फलफूल रहा है जमीन संबंधित फर्जीवाडे की शिकायत राजस्व अधिकारियों से की जाती है तो अधिकारी कार्यवाही करने के नाम पर शिकायत की जांच न करते हुए उसे फाइलों में ही दफन कर दिया जाता है। जब अधिकारियों के ही हाथ शासकीय जमीन के फर्जीवाड़े में लिप्त है तो सही जांच कैसे संभव है।
*फर्जीवाड़े के लिखे जा रहे नए नए अध्यय-* हमेशा से कोतमा तहसील फर्जी वाड़ा मामले में सुर्खिया बटोरती रही पिछले कई वर्षो से भू माफियाओ द्वारा शासकीय भूमि क्रय विक्रय एवं अवैध कब्जा करने की खबरे लगातार प्रदेश टुडे अखबार द्वारा प्राथमिकता से प्रकाशित की जा रही हैं । एक और नया फर्जी मुआवजा वितरण मामला सामने आया है बता दे कि कोतमा तहसील अंतर्गत पटवारी हल्का कल्याण पुर में गैर हकदार जंगल की शासकीय भूमि खसरा नं 296 से होकर नवनिर्मित सड़क एन एच 43 बनाई गई है उक्त शासकीय भूमि का मुआवजा कोतमा एस डी एम आर एन सिंह पटेल व आर आई पटवारी की मिलीभगत से वितरण कर दिया गया।
*शासन के साथ भी धोखाधड़ी* हमेशा कोतमा तहसील में पदस्थ भ्रष्ट अधिकारी कर्मचारी अनपढ़ गरीब किसानों की भूमि हेराफेरी करते रहे है लेकिन उक्त भ्रष्ट अधिकारी कर्मचारियो द्वारा अब मध्यप्रदेश शासन को भी चुना लगा दिया गया। 2 वर्ष पूर्व शहडोल से छत्तीसगढ़ सीमा रामनगर तक नेशनल हाइवे 43 का निर्माण कार्य किया गया है जिसमें जिन लोगों की जमीन अधिग्रहण की गई है उन लोगों को मध्यप्रदेश शासन द्वारा उचित मुआवजा वितरण किया जा रहा है जिसमें कोतमा तहसील के कल्याणपुर हल्का के भ्रष्ट पटवारी आर आई द्वारा मनचाहे तरीके से मोटी रकम लेकर भूमि अवार्ड कराई गई है जिसमें शासकीय भूमि भी शामिल है ।
*गैर हकदार किसान बने भू स्वामी* - कल्याणपुर स्थित भूमि खसरा नं 296 जो राजस्व रिकार्ड अनुसार गैर हकदार जंगल की शासकीय भूमि है फिर कोतमा तहसील के पूर्व भ्रष्ट अधिकारी एस डी एम,तहसीलदार,आर आई,पटवारी,राजस्व कर्मचारीयो ने उक्त शासकीय भूमि को अशीन नामक व्यक्ति जो कि बनियटोला कोतमा निवासी है के नाम स्थानन्तरण खसरा न.296 को कर दिया गया और अपने चहेते को भू स्वामी बना दिया गया और मध्यप्रदेश शासन से करोड़ों रुपये भूमि अधिग्रहण के नाम पर करोड़ो रूपये का फर्जीवाड़ा कर मुवाबजा बांटा गया।और उस शासकीय पैसे पर मिलकर बंदरबांट किया गया। और इस तरह तहसील के जिम्मेदारों ने गैर हकदार को भू स्वामी बनाकर शासन के पैसे में हेराफेरी कर शासन को करोड़ों का चुना लगा दिया गया।
*भूमि अधिग्रहण मामले में कौन है जिम्मेदार* - जब मध्यप्रदेश शासन द्वारा नेशनल हाइवे निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण का कार्य किया जा रहा था उस समय कोतमा एस डी एम की कमान आर एन सिंह पटेल के हाथ में थी एवं तहसीलदार अंतु सिंह सहित कल्याणपुर हल्का के आर आई राम सिंह धुर्वे पटवारी शिव कुमार पटेल थे और ऐसी जिम्मेदारी निभाई की गैर हकदार जंगल की शासकीय भूमि खसरा नं 296 का भी मुआवजा कब्जा धारी किसान से साठ गाँठ कर वितरण करा दिया लेकिन फर्जी मुआवजा वितरण मामले दोषी अधिकारी कर्मचारी के खिलाफ कार्यवाही करने की जगह उक्त फर्जी मुआवजा वितरण मामले पर पर्दा डाला जा रहा है। एक ने भू माफियाओ से मोटी रकम लेकर मध्यप्रदेश शासन की ही भूमि का मुआवजा वितरण कर दिया तो दूसरा भी मोटी रकम लेकर उक्त फर्जी मुआवजा वितरण मामले को जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाल दिया है वाह रे राजस्व विभाग का खेल एक दूसरे के गोल माल पर पर्दा डाल कर शासन को करोड़ों का चुना लगा रहे है।
कहना है-नेशनल हाईवे सड़क मार्ग में मुवाबजा वितरण के मामले में खसरा न. 296 एवं अन्य खसरा न. में दिए गए मुवाबजे की उच्च स्तरीय जांच की हो रही है। पूर्व कोतमा एस डी एम आर एन सिंह पटेल,आर आई धुर्वे,पटवारी शिव कुमार पटेल के विरुद्ध विभाग जांच कर रहा है और 296 खसरा खाता धारक के खाते पर शासन द्वारा दिये गए पैसो पर रोक लगवा दी गई है।
मिलिंद नागदेवे
एस डी एम, कोतमा

