अनूपपुर- जब सैंया भए कोतवाल तो डर काहे का यह कहावत चरितार्थ करता है इन दिनों राजनगर थाना अंतर्गत आमाडांड ओसीपी में कोयला माफियाओं के लिए जहां पर पूरी रात कोयला माफिया अपना गिरोह सक्रिय कर ट्रकों के ट्रक कोयला पार करती है और राजनगर पुलिस छोटे-मोटे चोरों को पकड़कर अपनी वाहवाही लूटती है, लेकिन असल में बड़े कोयला माफियाओं पर पुलिस अपनी हाथ नहीं डाल पा रही है जिससे कॉलरी प्रबंधन को करोड़ों का चूना लग रहा है तो चंद चांदी के सिक्के भी राजनगर थाने पर थाना प्रभारी को चढ़ा दिया जाता है जिससे राजनगर थाना प्रभारी इस काले कारोबार को देखना भी उचित नहीं समझते
वही पूरी रात माफिया पिकअप बाहर लगाकर कोयला छत्तीसगढ़ की सीमा को ले जाते हैं !
ग्रामीणों को बनाया मोहरा- जानकारी के अनुसार कोयला माफियाओं ने आमाडांड आसपास के ग्रामीणों को मोहरा बनाया हुआ है, जिन्हें पैसे का लालच देकर कोयला चोरी कराया जाता है, और उसे आसपास की जगह पर इकट्ठा कराया जाता है इसके बाद माफियाओं के द्वारा पिकअप वाहन लाकर बोरी से कोयले को भर वाहन में लोड कर छत्तीसगढ़ की सीमा पार कर मरवाही के आगे पथर्रा डिपो में कोयला को ले जाया जाता है वही कोयला माफिया ग्रामीणों का शोषण कर ही रहा है, इसके बाद चोरी के गुण भी सिखा रही है, जब राजनगर पुलिस ग्रामीणों को कोयला चोरी करते पाती है तो इन्हें थाने ले जाती है लेकिन इन माफियाओं को क्यों नहीं पुलिस गिरफ्तार करती है !
इन माफियाओं पर रामनगर पुलिस नहीं करती कार्यवाही- वैसे तो काले हीरे का खेल काफी अरसे से आमाडांड स पर चल रहा है लेकिन रामनगर पुलिस इस काले हीरे के खेल को बंद कराने में नाकाम साबित हो रही है जिससे कई बार प्रबंधन ने खुद चोरी करते कोयले को पकड़कर पुलिस के हवाले किया है तो एसपी की स्पेशल टीम ने भी कार्यवाही की है हाल ही के दिनों में वन विभाग के द्वारा अवैध रूप से ले जा रहे पिकअप वाहन को पकड़ कर कार्यवाही की थी लेकिन रामनगर पुलिस इस कार्यवाही से परहेज क्यों कर रही है इसका पता अभी तक नहीं चल पाया है !
आस-पास के गांव में करते हैं कोयला इकट्ठा- जानकारी के अनुसार कोल माफिया ग्रामीणों की मदद से आसपास के गांव नीमहा, फुलवारी टोला, आमाडाड, टिमकी टोला, खोडरी सहित आसपास के गांव में ग्रामीणों के माध्यम से कोयला चोरी कराकर इकट्ठा कराया जाता है और रात को 10:00 बजे से सुबह 5:00 बजे तक पिकअप वाहन से लगातार कोयले की खेप छत्तीसगढ़ के पथर्रा डिपो में पहुंचाई जाती है जिसकी कीमत स्थानीय थाना को पहुंचा दी जाती है जिस पर स्थानीय थाना को जानकारी होने के बावजूद भी इस ओर कोई कार्यवाही नहीं कर रहे हैं !