कोतमा- अनूपपुर जिले में बिना रजिस्ट्रेशन के बहुत से चिकित्सक मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं और मरीजों का स्वास्थ्य ठीक करने के वजाय बड़ी समस्या में डाल रहे हैं।कई बार गलत इलाज़ के कारण मरीज बड़ी दुर्घटना के शिकार हो जाते हैं और किसी जिम्मेदार के कान में जूं तक नहीं रेंगती।कोतमा में और कई आसपास के गाँवों में कई ऐसे चिकित्सक हैं जो बिना किसी रेजिस्ट्रेशन के ही चिकित्सा कर रहे हैं।कोतमा में वर्तमान समय में डॉ अशोक राजपूत अपना जलवा बिखेर रहे हैं।डॉ अशोक राजपूत आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति से उपचार करने के लिए पंजीकृत हैं लेकिन साहब यहाँ एलोपैथिक इलाज़ करने से भी पीछे नहीं हटते हैं।सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार डॉ साहब एक नामीगिरामी पैथोलॉजी से संपर्क बनाकर मरीजों को लूटने का कार्य कर रहे हैं।डॉ राजपूत मरीजों को कई तरह के मँहगे टेस्ट लिख देते हैं और एक विशेष पैथोलॉजी से टेस्ट कराने के लिए बाध्य करते हैं, बाकी दूसरी पैथोलॉजी की रिपोर्ट पर साहब को भरोसा नही होता।आखिर साहब का हिस्सा भी तो कोई चीज है।इसके पहले भी डॉ राजपूत के चिकित्सा पद्धति के विषय में खबरें प्रकाशित कर जिम्मेदारों का ध्यान आकर्षित कराने का प्रयास किया जा चुका है लेकिन इन्हें पर्याप्त राजनीतिक संरक्षण प्राप्त होने के कारण ये कोतमा क्षेत्र में अपनी मनमानी करने के लिए स्वतंत्र हैं।कोई भी स्वास्थ्य विभाग का अधिकारी इस क्षेत्र में विचार नहीं कर पा रहे हैं, आखिर क्या कारण हो सकता है?कहीं मरीज़ों के जीवन से खिलवाड़ करने के लिए भी तो बाकी के विकास कार्यों की तरह ही हिस्सेदारी का खेल नहीं खेला जा रहा है?क्या केवल सरकार बदलने मात्र से क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्था ठीक हो जाएगी?क्या अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को इस क्षेत्र में ध्यान नहीं दिया जाना चाहिए?ऐसे बहुत से क्या और क्यों ज़मीनी स्तर पर विद्यमान हैं लेकिन सभी जिम्मेदार मौन व्रत धारण किए हुए हैं और किसी क्षेत्र में किसी प्रकार की बड़ी दुर्घटना होने पर सहानुभूति देने पहुंच जाते हैं लेकिन इसके लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए, इस ओर कोई भी विचार करने की स्थिति में नहीं है।
डॉ साहब और पैथालॉजी संचालक की यारी,पड़ रही मरीजों पर भारी
सच से सामना
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