अनुपपुर-कोतमा में पदस्थ डिप्टी रेंजर त्रिपाठी के डेढ़ लाख रिस्वत के मामले की फ़ाइल में अभी धूल जमी भी नही की वनपरिक्षेत्र कोतमा अंतर्गत लतार सर्किल में पदस्थ डिप्टी रेंजर राम सुरेश का मामला चर्चा में चल रहा है।लम्बे समय से सरकारी कुर्सी पर कूल्हे टिका के बैठे ये भृष्ट अधिकारी सरकारी कार्यालयों को कार्यालय कम वसूली ऑफिस ज्यादा बनाके रखे हैं।अभी कुछ ही महीने पूर्व कोतमा में पदस्थ डिप्टी रेंजर त्रिपाठी द्वारा घुस लेने का मामला प्रकाश में आया था जिसे मीडिया ने काफी उछाला भी था।जिसपर महज खाना पूर्ति करते हुए मामले को रफा दफा करते हुए त्रिपाठी का कोतमा से ट्रांसफर कर दिया गया।ताकि मामला दब जाए उनके जगह दूसरे अधिकारी को बैठा दिया गया ताकि वसूली बन्द न हो।दूसरा मामला लतार बीट के डिप्टी रेंजर राम सुरेस शर्मा अपने बीट में अवैध कार्यों में संचालित वाहन मालिकों से कार्यवाही न करने की एवज में अपने ही ऑफिस में बकायदा खाकी वर्दी में रूपये लेते विडियो में दिखाई पड़ रहे हैं।सरकारी विभाग में पदस्थ ये अधिकारी अपने पद की गरिमा को किस सम्मान के साथ निभाते हैं यह इनकी वसूली के वजन से ही समझ में आता है।वन विभाग की भूमि पर अवैध तरीके से उत्खनन और परिवहन करते हुए ट्रैक्टर मालिकों से अवैध रूप से आफ़िस पर वर्दी पहन कर ट्रैक्टर मालिक से लिये मोटी रकम रिश्वत, पहली बार नहीं हुआ यह मामला इनके यह कारनामे आए दिन होते रहते हैं अवैध वसूली और रिश्वत लेते हुए देखे गए कैमरे पर।उक्त सम्बन्ध में जब रामसुरेश शर्मा से उक्त कृत्य के विषय में संपर्क किया गया तो उनका कहना है कि मुझे बेवजह फंसाया जा रहा।मामले के सम्बन्ध में जब सी सी ऍफ़ शहडोल से संपर्क करने की कोशिश की गयी तो उनका मोबाइल रिसीव ही नही हुआ।अनूपपुर डी ऍफ़ ओ भार्गव के मोबाइल में बार बार घण्टी लगाने पर कोई जवाब नही मिला।और लतार बीट के डिप्टी रेंजर रामसुरेश शर्मा का कहना है उच्चाधिकारियों के साथ बैठा हूँ।मैं बाद में बात करता हूँ।जब कभी अधिकारियों से इस तरह के मामले में जानकारी चाही जाती है तो या तो अधिकारी कहते हैं कि उक्त मामले में शिकायत नही मिली हैं।या जांच को लंबित करने के लिए उस अधिकारी का अन्यत्र ट्रांसफर कर देते हैं।इस तरह पुरे संभाग में खाकी को बदनाम करते हुए अवैध वसूली संचालित है।जिसकी एवज में दिलेरी से पूरे जिले में अवैध खदाने संचालित है जो मजदूरों से ब्लास्टिंग कराकर दिन रात पत्थर उत्खनन कराते हैं और कोई मजदूर यदि दब के मर गया तो लाख दो लाख देकर मामले को रफ दफा कर दिया जाता है।
अनुपपुर-कोतमा में पदस्थ डिप्टी रेंजर त्रिपाठी के डेढ़ लाख रिस्वत के मामले की फ़ाइल में अभी धूल जमी भी नही की वनपरिक्षेत्र कोतमा अंतर्गत लतार सर्किल में पदस्थ डिप्टी रेंजर राम सुरेश का मामला चर्चा में चल रहा है।लम्बे समय से सरकारी कुर्सी पर कूल्हे टिका के बैठे ये भृष्ट अधिकारी सरकारी कार्यालयों को कार्यालय कम वसूली ऑफिस ज्यादा बनाके रखे हैं।अभी कुछ ही महीने पूर्व कोतमा में पदस्थ डिप्टी रेंजर त्रिपाठी द्वारा घुस लेने का मामला प्रकाश में आया था जिसे मीडिया ने काफी उछाला भी था।जिसपर महज खाना पूर्ति करते हुए मामले को रफा दफा करते हुए त्रिपाठी का कोतमा से ट्रांसफर कर दिया गया।ताकि मामला दब जाए उनके जगह दूसरे अधिकारी को बैठा दिया गया ताकि वसूली बन्द न हो।दूसरा मामला लतार बीट के डिप्टी रेंजर राम सुरेस शर्मा अपने बीट में अवैध कार्यों में संचालित वाहन मालिकों से कार्यवाही न करने की एवज में अपने ही ऑफिस में बकायदा खाकी वर्दी में रूपये लेते विडियो में दिखाई पड़ रहे हैं।सरकारी विभाग में पदस्थ ये अधिकारी अपने पद की गरिमा को किस सम्मान के साथ निभाते हैं यह इनकी वसूली के वजन से ही समझ में आता है।वन विभाग की भूमि पर अवैध तरीके से उत्खनन और परिवहन करते हुए ट्रैक्टर मालिकों से अवैध रूप से आफ़िस पर वर्दी पहन कर ट्रैक्टर मालिक से लिये मोटी रकम रिश्वत, पहली बार नहीं हुआ यह मामला इनके यह कारनामे आए दिन होते रहते हैं अवैध वसूली और रिश्वत लेते हुए देखे गए कैमरे पर।उक्त सम्बन्ध में जब रामसुरेश शर्मा से उक्त कृत्य के विषय में संपर्क किया गया तो उनका कहना है कि मुझे बेवजह फंसाया जा रहा।मामले के सम्बन्ध में जब सी सी ऍफ़ शहडोल से संपर्क करने की कोशिश की गयी तो उनका मोबाइल रिसीव ही नही हुआ।अनूपपुर डी ऍफ़ ओ भार्गव के मोबाइल में बार बार घण्टी लगाने पर कोई जवाब नही मिला।और लतार बीट के डिप्टी रेंजर रामसुरेश शर्मा का कहना है उच्चाधिकारियों के साथ बैठा हूँ।मैं बाद में बात करता हूँ।जब कभी अधिकारियों से इस तरह के मामले में जानकारी चाही जाती है तो या तो अधिकारी कहते हैं कि उक्त मामले में शिकायत नही मिली हैं।या जांच को लंबित करने के लिए उस अधिकारी का अन्यत्र ट्रांसफर कर देते हैं।इस तरह पुरे संभाग में खाकी को बदनाम करते हुए अवैध वसूली संचालित है।जिसकी एवज में दिलेरी से पूरे जिले में अवैध खदाने संचालित है जो मजदूरों से ब्लास्टिंग कराकर दिन रात पत्थर उत्खनन कराते हैं और कोई मजदूर यदि दब के मर गया तो लाख दो लाख देकर मामले को रफ दफा कर दिया जाता है।
