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अनूपपुर जनजातीय कार्य विभाग का प्रभारी बिना आदेश का अधिकारी


अनूपपुर--प्रथम श्रेणी प्राचार्य से आदिवासी विकास कार्यालय में  ए सी  के पद पर कुछ समय से  प्रभारी हुए प्राचार्य डी एस राव सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग की कुर्सी पर ऐसे जमे की आदेश की समयावधि पूर्ण होने के बाद भी तत्कालीन कलेक्टर अनुग्रह पी की मेहरबानियों से बिना किसी आदेश के मौखिक रूप से पदासीन हैं।यह अजब बात है कि डी एस राव का मूल पद प्राचार्य है और जैसे ही उनकी जाति प्रमाण पत्र संबंधी शिकायत अटल स्वराज संपादक एवं आर टी आई कार्यकर्ता मुरलीधर मिश्रा निवासी भोपाल द्वारा पत्र दिनांक 21/6/2018 फर्जी जाती प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी करने संबंधी शिकायत प्रमुख सचिव, जनजातीय कार्य विकास (म.प्र.) में कई गयी। तो डी एस राव के द्वारा लॉबिंग करना शुरु कर दिया गया,और उसमें वरिष्ठ अधिकारियों का साथ और सहयोग भी मिला ,और उसी समय सहायक आयुक्त श्री पी एन चतुर्वेदी के छुट्टी समयावधि के दौरान तक के लिए अपने पदीय दायित्व के साथ अतिरिक्त रूप से सहायक आयुक्त,जनजातीय कार्य विभाग,अनूपपुर का प्रभार दे दिया गया था,लेकिन फ़र्ज़ी जाति प्रमाण पत्र की कंही पोल न खुल जाए उसके लिए उनकी मुख्य समर्थक रहे कलेक्टर पी्.अनुग्रह ने उन्हें सहायक आयुक्त पद का प्रभार को न छोड़ने के लिए आश्वस्त कर दिया,जबकि इस संबंध में कोई आदेश नही है,न ही शासन का और न ही प्रशासन का,यह कितना हृस्यस्पद है कि जिस व्यक्ति के विरुद्ध शिकायत हुई हो और जाँच चल रही हो और   जंहा से अभिमत जाना हो उसी पद पर एक ऐसे व्यक्ति को प्रभारी बना दिया जाता है,यदि प्राचार्य को ही जनजातीय कार्य विभाग का प्रभारी बनाना था तो उसमें नियमतः वरिष्ठता को देख कर बनाना था,तो उसमें पट्टवी का नाम सबसे आगे है,लेकिन ऐसा नही हुआ,और राव को नियम विरुद्ध तरीके से प्रभार देकर दस्तावेजों से छेड़-छाड़ करने का सुनियोजित सड्यंत्र रचा गया,जिससे दस्तावेजों में हेर-फेर किया जा सके,RTI कार्यकर्ता मुरलीधर मिश्रा के द्वारा श्री राव के कार्यकाल में जितने भी सूचना अधिकार के आवेदन लगाये गए किसी का भी जवाब नही दिया गया,डी. यस.राव प्रभारी सहायक आयुक्त के
 पद पर रहते हुए लगभग सभी छात्रावासों से अवैध वसूली के समाचार लगातार मिलते रहते हैं,हॉल में ही एक अधीक्षक ने समाचार में नाम न छापे जाने के शर्त में बताया कि हॉल में ही मुझसे 40000 रूपए की अवैध रूप दवाब बनाकर और ससपेंड कर देने का डर दिखाकर वसूली की गई ,
डी एस राव के जाति प्रमाण पत्र  की हुई शिकायत
के संबंध में विभागीय जांच जारी है देखना यह है कि कब तक जांच पूरी हो पाती है,अभी तक तो लेट लतीफ़ ही हो रहा है,08 माह हो गए है,पर जाँच किसी अंजाम तक नही पंहुच पाया है,शासन से कलेक्टर को शिकायत की जाँच संबंधी पत्र तो आया है,लेकिन यह समय ही बतायेगा की वर्तमान कलेक्टर इसपर कितनी गंभीरता दिखाते हैं,हलाकि उनके चाल-ढाल से तो नही लगता कि वो किसी निर्णय को ले पाने में सक्षम हों,उनके यंहा का निर्णय तो शिवपुरी और जिला पंचायत अनूपपुर से होता है,जिसका हालिया उदाहरण सहायक आयुक्त,जनजातीय कार्य विभाग,अनूपपुर, पी.एन.चतुर्वेदी को दिए गए उच्च न्यायालय के स्थगन आदेश है,जिसमे उच्च न्यायालय ने यह आदेश किया है कि आयुक्त,जनजातीय कार्य विभाग,मध्य प्रदेश,के पत्र दिनाँक-06.09.2018के आदेश का पालन हो,जिसमे पी.एन. चतुर्वेदी के छुट्टी के समयावधि के लिए मात्रा डी. एस. राव को सहायक आयुक्त का प्रभार दिया गया था,और चतुर्वेदी के छुट्टी से आते ही दी.एस. राव का सहायक आयुक्त का प्रभारी रुपी आदेश स्वतः समाप्त हो जाता है,लेकिन यह कितना हृष्यस्पद है कि इस आदेश का पालन न होने से उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा,और उच्च न्यायालय के आदेश के बाद भी कलेक्टर अनूपपुर द्वारा उच्च न्यायालय के आदेश का अवमानना करने का दुःसाहस करते हुए परिक्षण के लिए भेजा गया है,इससे सिद्ध होता है,कि या तो कलेक्टर अनुपपुर को ज्ञान और अनुभव की कमी है या फिर वह जान बूझकर उच्च न्यालय से अपनेआप को बड़ा बताने की दुःसाहस किया जा रहा है,इसका मतलब साफ है कि कलेक्टर की नज़र में उच्च न्यायालय जैसे संवैधानिक संस्था की कोई अवकात नही,अब यह समय ही बताइयेगा की आगे इन शिकायतों और न्यायालय के निर्णय पर क्या होगा लेकिन अभी तक तो ढांक के तीन पात ही हैं, और डी. एस. राव बड़े सानो-शौकत के साथ वरिष्ठ अधिकारियों के सहऔर आशीर्वाद से जनजातीय कार्य विभाग के प्रभारी पद पर पूर्ण रूपेण विराजमान हैं।।
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