नगर पालिका की बैठक का मुख्य मुद्दा
नपा अध्यक्ष के ध्वजारोहण पर पार्षदों ने जताई आपत्ति
कोतमा- परिषद की बैठक पर बिखरे पार्षद नपा अध्यक्ष के ध्वजारोहण पर पार्षदों ने जताई आपत्ति
तीन भाजपा पार्षदों ने दिया कांग्रेस का साथ। कोतमा नगर पालिका में सोमवार को ही साधारण सम्मेलन परिषद की बैठक में आगामी स्वतंत्र दिवस पर कोतमा की हृदय स्थली गांधी चौक पर ध्वजारोहण को लेकर तीखी बहस हुई जिसमें अध्यक्ष के द्वारा ध्वजारोहण करने पर निर्दलीय पार्षद ने आपत्ती दर्ज कराई परिषद की बैठक में वार्ड नंबर 3 के पार्षद ने ध्वजारोहण को लेकर विधायक के द्वारा ध्वजारोहण कराए जाने का प्रस्ताव रखा जिस पर समान चर्चा के बाद बैठक का माहौल गरमा दिया प्रस्तावित मुद्दे को लेकर पार्षदों ने सहमति की बात सीएमओ तथा नपाध्यक्ष के सामने रखी जिसमें भाजपा के तीन पार्षदों ने कांग्रेसी विधायक का समर्थन किया तथा निर्दलीय पार्षद के प्रस्ताव पर हामी भरी|
अध्यक्ष नहीं विधायक फहराएंगे तिरंगा।
कोतमा नगर पालिका में परिषद की बैठक में प्रस्तावित मुद्दे पर जमकर बहस छिड़ी जिसके बाद प्रस्तावित मुद्दे को लेकर पार्षदों में वोटिंग की गई विधायक के ध्वज फहराने के पक्ष में 8 पार्षदों ने अपनी सहमति दर्ज कराई वही अध्यक्ष को मिलाकर साथ पार्षद अध्यक्ष के पक्ष में वोटिंग की जिसके बाद बैठक में कोतमा के ह्रदय स्थली गांधी चौक में विधायक के द्वारा ध्वजारोहण कराने का निर्णय लिया गया उपाध्यक्ष समेत अन्य दो पार्षदों ने की विधायक के पक्ष में वोटिंग
शपथ ग्रहण के अभी 2 वर्ष ही नहीं हुए थे की भाजपा के नवनिर्वाचित पार्षद तथा नापा उपाध्यक्ष ने ना सिर्फ पार्टी बल्कि अध्यक्ष का परिषद की बैठक में खुलकर विरोध किया गलियारों में चर्चाएं हैं कि उपाध्यक्ष ने अपने अन्य दो साथियों के साथ कांग्रेसी तथा निर्दलीय पार्षदों का खुलकर वकालत की तथा अध्यक्ष के द्वारा ध्वजारोहण करने का विरोध किया जिसके बाद पार्टी तथा अध्यक्ष से विमुख होकर उपाध्यक्ष ने अपना वोट निर्दलीय पार्षद के प्रस्ताव पर विधायक के पक्ष में वोटिंग की।
विकास के मुद्दे को लगा ग्रहण-
कोतमा में नगर पालिका के चुनाव में भाजपा की विजय घोषित होने के बाद ही कोतमा की जनता ने विकास की तरफ अपनी नजरें लड़ाई हुई थी शुरुआती कार्यकाल जिस तरह नवा का चल रहा था उसे देख कर विकास कामना की गई थी लेकिन नगर पालिका परिषद के कार्यकाल के दौरान आपसी मतभेद को लेकर जिस तरह उपाध्यक्ष ने पार्टी तथा अध्यक्ष का साथ छोड़ा उसे देख कर तो यही कहा जा सकता है कि कोतमा की विकास को ग्रहण सा लग गया है जोकि आने वाले पंचवर्षीय के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।
विकास का मुद्दा पीछे छूटा-
आने वाले 5 सितम्बर को जहां कोतमा नगर पालिका परिषद की कार्यावधि के दो वर्ष पूरे होंगे उसके ठीक 1 महीने पूर्व 5 अगस्त को जहां पूरा देश धारा कश्मीर मुद्दे के धारा 370,व अनुच्छेद 35,a के संसद में प्रस्ताव पेश होने व राष्ट्रपति की सहमति पर खुशियां मना रहा था।की अब जम्मू कश्मीर में भारत का संविधान लागू होगा व एक देश एक ध्वज फहरेगा।वही कोतमा नगर पालिका में इसके विपरीत साधारण सम्मिलन की बैठक में नगर की समश्याओ,व विकास के मुद्दे तो दूर की बात गांधी चौक में झंडा कौन फहराएगा इस मुद्दे पर बहस चलती नजर आयी।पिछले दो वर्ष के कार्यकाल में आपसी खींचातान के चर्चे अब परिषद से बाहर निकलकर लोगों के मुह से सुनने को मिलने लगे हैं।विकास तो लगभग गायब हो चुका हैं,,नाली,सड़क पुलिया भवन निर्माण तो दूर वर्चस्व की लड़ाई मुख्य मुद्दा बनता जा रहा है।
आने वाले 15 अगस्त की तैयारियों की नगर पालिका की बैठक में पधारे विधायक सुनील सराफ ने नगर हित के मुद्दों को व विकास को लेकर चर्चा किये व नगर विकास में हर सम्भव सहयोग का भरोसा दिलवाए,,वार्ड नंबर 3 के पार्षद संदीप शिवहरे द्वारा परिषद में यह प्रस्ताव रखा गया कि नव निर्वाचित लोकप्रिय जननायक विधायक सुनील सराफ को कोतमा नगर के हृदय स्थल गांधी चौक में ध्वजा रोहण करने का अवसर दिया जाए इस हेतु मुख्य नगर पालिका अधिकारी को लिखित में दो दिन पूर्व एक आवेदन भी दिया गया था।जिसमे पी आई सी की बैठक कैमरे की निगरानी में कराने की मांग भी की गई थी।
कौन फहराये गांधी चौक में झंडा पार्षदों की अपनी अपनी मंशा-
परिषद की बैठक में विभिन्न मुद्दों के साथ मुख्य मुद्दे के रूप में लाये प्रस्ताव की क्यूँ न विधायक फहराये झंडा पर सभी पार्षदों ने अपनी अपनी राय दी जिसपर काफी नोक झोंक के बाद सबने पक्ष विपक्ष पर अपनी अपनी सहमति जताई।जिसमे 8 पार्षदों ने विधायक के झंडा फहराने पर सहमति जताए तो वहीं मात्र 6 पार्षद ही अध्यक्ष के पक्ष में नजर आए,,जिसमे वार्ड क्र, 1,4,5,6,10,13, के पार्षद और स्वयं अध्यक्ष मिलाकर कुल 7 लोग अध्यक्ष के ध्वजारोहण के पक्ष में नजर आए।वही,वार्ड क्र,2,3,7,8,9,12,14,15, के पार्षद विधायक द्वारा गांधी चौक में ध्वजारोहण के पक्ष में सहमत हुये।जिसपर अंतिम निर्णय विधायक के पक्ष में नजर आया।




