भागवत कथा के रुक्मिणी विवाह में प्राप्त समस्त उपहारों को व्यास ने दिया कन्या को दान
कोतमा- कोतमा में चल चल रही सात दिवसीय कथा में कथा वाचक श्री कृष्ण रेणु जी ने सुखदेव एवं परीक्षित का चरित्र, कपिल अवतार एवं भीष्म प्रतिज्ञा का बड़ा सुंदर वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत केवल पुस्तक नहीं साक्षात श्रीकृष्ण स्वरूप है जिसमे निहित संदेश को श्रोताओं को जीवन मे उतारना चाहिए।उन्होंने कहा कि कन्यादान या कन्या के लिए दान समस्त दान, व्रत, तीर्थ,पुण्यदायी कर्मों से बढ़कर है। उन्होंने कहा कि भागवत के चार अक्षर इसका तात्पर्य यह है कि भा से भक्ति, ग से ज्ञान, व से वैराग्य और त त्याग जो हमारे जीवन में प्रदान करे उसे हम भागवत कहते है। इसके साथ साथ भागवत के छह प्रश्न, निष्काम भक्ति, 24 अवतार श्री नारद जी का पूर्व जन्म, परीक्षित जन्म, कुंती देवी के सुख के अवसर में भी विपत्ति की याचना करती है। क्यों कि दुख में ही तो गोविंद का दर्शन होता है।
पुराना हॉस्पिटल प्रांगण में चल रही सात दिवसीय कथा में व्यास जी ने सुखदेव एवं परीक्षित का चरित्र, कपिल अवतार एवं भीष्म प्रतिज्ञा का बड़ा सुंदर वर्णन किया।
सामाजिक चेतना को जागरूक करने के लिए भागवत कथा सर्वोत्तम मॉध्यम है-
व्यास श्री कृष्ण रेणु ने कहा कि भागवत कथा बाहर और भीतर के जीव को बदल देता है। वह जिस प्रकार बाहर सौम्य है वैसे अंदर भी सौम्य है। कलयुग में भागवत कथा का फल सतयुग में कई गुणा अधिक है। इसके माध्यम से हम समाज में प्रेम व सद्भव कायम रख सके। श्रीमदभागवत कथा के पांचवें दिन कथा व्यास श्री कृष्ण वेणु जी कृष्ण जन्मोत्सव बड़े धूमधाम से मनाए व कृष्ण की लीलाओं का वर्णन किये इस कथा के अलावा नंद का 'कर' अदायगी के लिए मथुरा जाना, महाराज वासुदेव संग वार्ता, कंस द्वारा कृष्ण जन्म अवगत होना और पूतना वध कर उसे मोक्ष गति प्रदान करने की कथा सुनाई गई। इन चर्चित कथाओं के अलावा कंस द्वारा भेजे गए दैत्य का उद्धार करने की कथा सुनाई।व्यास ने एक वर्ष की अवस्था पर कृष्ण-बलराम के नामकरण संस्कार में मन को आकर्षित करने के कारण कृष्ण व अधिक बल होने के कारण बलराम नामकरण करने की कथा सुनाई। भगवान की लीलाओं का भी वर्णन किया गया। जैसे भगवान का घुटनों के बल चलना, माखन लीला,मां यशोदा को मुंह में ब्रह्मांड के दर्शन कराना, रस्सी में मां द्वारा ना बंधना देने की कथा सुन श्रद्धालु भक्ति रस में डूब गए। कथा व्यास ने ग्वाल और गाय समेत वृंदावन यमुना तट पर निवास करना, भगवान की गो-चरण लीला, वृंदावन में वत्सासुर दैत्य का उद्धार, बलराम द्वारा बकासुर का उद्धार, ग्वालों संग भोजनपान की लीला का वर्णन किया। इनके अलावा गोवर्धन गिरिराज का निज स्वरूप में पूजन करवाये और गिरि राज धारण कर ब्रजवासियों की रक्षा करने की कथा का श्रद्धालुओं ने रसपान किया।
कृष्ण और रुक्मिणी विवाह से आयोजक ले एक निर्धन कन्या के विवाह कराने का संकल्प-
भागवत कथा के प्रथम दिन से ही कथा को एक सामाजिक चेतना जगाने का मॉध्यम बताते हुए व्यास श्री कृष्ण वेणु ने दिखावे, आडम्बर, व ताम झाम से परिपूर्ण कथा का विरोध किया उनका कहना है कि भागवत ग्रंथ ज्ञान को प्रसारित करने और जीवन को मोक्ष दिलाने का एक मॉध्यम भागवत कथा है।जिसमे सिर्फ भागवत में वर्णित कथाओं का ही वर्णन होना चाहिए न कि बाहर के प्रसंगों का,साथ ही भजन की श्रृंखला और झांकियों के ताम झाम से श्रोताओं को खुस करने का मॉध्यम भागवत नही है।भागवत कथा में होने वाले विभिन्न खर्चों को बचाकर किसी जरूरत मन्द इंसान को दान करना ज्यादा पूण्य का काम बताये।कथा के छठवें दिन व्यास श्री कृष्ण रेणु ने रुक्मणि विवाह में पौ पखरी में प्राप्त समस्त उपहारों नगदी,व आभूषण को किसी गरीब कन्या के विवाह हेतु दान करने का संदेश दिए।जिसका अनुशरण करते हुए भजन गायक संदीप शिवहरे ने संगीत कार्य मे उनके सहयोगी रहे स्व,रवि गुप्ता के बच्चियों के विवाह में सहयोग हेतु पहले से मन से संकल्पित थे।रवि गुप्ता जो कला जगत का एक अच्छा कलाकार था जो महज 30 साल की उम्र में ही गुजर गए थे।उनकी दो छोटी बच्चियां है।उन बच्चियों के भविष्य को लेकर चिंतित कला जगत के समस्त कलाकार और भजन गायक संदीप शिवहरे ने दोनों बच्चियों के नाम नगद राशि 26/26 हजार रुपये नव्या गुप्ता और सिमरन गुप्ता के नाम की एफ डी उनकी माँ को शालू गुप्ता को दिए व व्यास श्री कृष्ण वेणु ने रुक्मिणी विवाह में प्राप्त समस्त सामग्रियों,नगदी व आभूषण को उन बच्चियों को दान कर दिए।इस तरह व्यास गद्दी से एक सामाजिक संदेश देने का कार्य किये की कन्या के विवाह हेतु दान कन्या दान के बराबर पूण्य फलदायी है। यदि हर भागवत आयोजक व व्यास गद्दी में विराजित भागवताचार्य यह संकल्प लेले तो हर रुक्मिणी विवाह में एक निर्धन कन्या का उद्धार सम्भव है और आयोजक को भी सात दिवसीय भागवत कथा सुनने और इस दान से पूण्य फल की निश्चित प्राप्ति होगी और समाज मे एक जनचेतना भी जाग्रत होगी।
कथा के अंतिम दिवस होगा देवेश शर्मा का भव्य जगराता-
कला जगत में स्वयं जस गायन में ख्याति प्राप्त मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ में जाना पहचाना नाम संदीप शिवहरे जिन्होंने कन्या भ्रूण हत्या जैसे गम्भीर अपराध को रोकने हेतु *जागो मा जागो*नामक अल्बम में बेटी न चाहे कोई यहां नामक गीत से एक सामाजिक चेतना जगाने का प्रयास किये।उनके द्वारा आयोजित भागवत की समाप्ति के अवसर पर अंतिम दिवस 21/9/2019 को छत्तीसगढ़ के जस सम्राट देवेश शर्मा का भव्य जागरण का आयोजन रखा गया है जिसमे समस्त श्रोताओं को आमंत्रित किया गया है।

