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चायनीज दीये का करे बहिष्कार-मोहनी वर्मा

कोतमा- संस्कृति व परंपराओं पर आधुनिक जमाने की चकाचौंध भारी पड़ रही है। भारतीय संस्कृति से जुड़े पारंपरिक त्योहारों पर यहां के कारीगरों द्वारा निर्मित सामान को तरजीह दी जाती है,लेकिन अब दीपावली पर मिट्टी के दीये की जगह बिजली के बल्ब चमकते हैं। आज इलेक्ट्रोनिक सामान को दीये की शक्ल दे दिए जाने से मिट्टी के दीयों की मांग कम हुई है। ऐसे में कुम्हारों की मेहनत पर भी वसूली होती है।

नही ली जाएगी बैठकी-

नगर पालिका परिषद,कोतमा की अध्यक्षा श्रीमती मोहिनी धर्मेंद्र वर्मा ने मीडिया से चर्चा करते हुए बताया कि दिवाली के समय जगह-जगह ठेले और दुकानें लगाकर दीये बेचने वालों से नगर में किसी भी तरह की वसूली नहीं की जाएगी।दरअसल,कोतमा नपा अध्यक्षा ने भी कुम्हारों के लिए खास पहल की है। नपा अध्यक्षा ने बताया कि देश में तेज़ी से चाइनीज़ झालड़ों और इलेक्ट्रोनिक चमक दमक से स्थानीय कलाकरों द्वारा बनाए जाने वाले दीयों का बाज़ार कमज़ोर हो रहा है।इसे बढ़ावा देने के लिए यह पहल की गयी है सोशल मीडिया पर भी इस तरह की पहल कई लोग कर रहे हैं जिससे इन गरीब कारिगरों की भी दिवाली खुशी खुशी मन सके।

चायनीज दीये बेचने पर होगी जब्ती-

कुम्हारों के लिए कारोबार का यह अवसर सालभर में एक बार आता है बाजार में चाइनीज दीये भी प्रचलन में है इसके अलावा अब लोग लाइटों की सजावट पर भी ज्यादा ध्यान देने लगे हैं। दीयों की परंपरागत व्यवसाय करने वाले कुम्हारों के लिए पहले ही दरवाजे बंद हो रहे हैं। वही कोतमा नपा अध्यक्षा ने नगर के दुकानदारो से अपील की है कि दिवाली के समय पर दुकान में चायनीज दीये न बेचे,चायनीज दिए बेचने वाले दुकानदारों से चायनीज दीये जब्त कर कार्यवाही की जाएगी।








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