क्या इस तरफ भी ध्यान देगा प्रशासन
कोतमा/तहसील कार्यालय के शासकीय रिकॉर्ड में हेराफेरी का खेल पूर्व से ही खेला जाता रहा जिसको लेकर कई बार अखबार की सुर्खियां बन चुका कोतमा तहसील और पदस्थ बाबू की चर्चा इन दिनों आम हो गई है। कोतमा तहसील में वर्षों से जमा बाबू पूर्व में शासकीय रिकॉर्ड में हेरफेर कर खजाने के गमन को लेकर हवालात की हवा भी काट चुके हैं जिसका मामला अभी चल रहा है वही बड़े बाबू इन दिनों कोतमा तहसील में कई वर्षों से जमकर क्षेत्र के हर छोटे-बड़े भू माफिया दलालों से अच्छे संबंध को लेकर सुर्खियों में है। किसानों की माने तो बड़े बाबू बिना लक्ष्मी लिए कोई भी काम नहीं करते जहां एक और सुबह से देर रात तक बड़े बाबू के आवाज से लेकर बड़े बाबू के कार्यालय तक भूमाफिया गिरोह बड़े बाबू के इर्द-गिर्द देखे वजा सकते है जहां बड़े बाबू आम किसानों का काम करना मुनासिब नहीं समझते वहीं भू माफिया के बड़े बड़े काले काम को सफेद करने में जुटे रहते हैं,
कई मामले की नहीं मिल रही फाइल
कोतमा तहसील में जब से बड़े बाबू जब से कुर्सी संभाले हैं तब से लेकर अब तक कई रजिस्ट्री नामांतरण एवं अन्य प्रकरणों के फाइल आज भी नदारद हैं वही कई फाइल तो बड़े बाबू के आवास में धूल चाटते पड़े हैं पर बड़े बाबू है कि उन्हें कोई फर्क नहीं जैसे कि उन्होंने दलालों के काम का ठेका लेने के नाम से जाने जाते हैं वही कोतमा तहसील अंतर्गत कई जमीन की खरीद-फरोख्त में बड़े बाबू का अहम योगदान माना जाता है भोली भाली गरीब जनता को बड़े बाबू अपनी कुर्सी के बलबूते डरा धमका कर भू माफियाओं को गरीबों की जमीन को औने पौने दाम में सौदा करने कराने से बाज नहीं आते, सूत्रों की माने तो डोगरिया का केवट साहब के खासम खास में माना जाता है जिस पर भी पूर्व में कई गमन के मामले विचाराधीन है वही बड़े बाबू के रात की व्यवस्था करने के लिए जाना जाता है वही सुबह से शाम तक बाबू अपनी कुर्सी का दुरुपयोग करते हुए कई काले काम को लेकर सुर्खियों में बने रहते हैं जहां पर पूर्व में अधिवक्ताओं ने भी बाबू के कार्य बाबू माफियाओं से सांठगांठ का आरोप बड़े बाबू पर कई बार लगते रहे पर बड़े बाबू का कहना है कि मैं बड़े-बड़े गोलमाल करके भी आज इस कुर्सी पर दे लेकर बैठा हूं जो मैं यहां लोगों के भाग्य लिखने नहीं अपना काम करने आया हूं अब बड़े बाबू कौन सा अपना काम कर रहे हैं यह जन चर्चा भी इन दिनों क्षेत्र में सुर्खियां बटोर रही है सूत्रों की मानें तो उच्च अधिकारियों की मेहरबानी से बड़े बाबू बेलगाम होकर आम जनता की खून चूसने में लगे हैं जिन पर कार्यवाही के बदले बड़े बाबू कई वर्षों से कोतमा तहसील के कुर्सी में बैठ कर कई काले कारनामे करते रहेंगे या इन पर कोई कार्रवाई हो सकेगी यह सवाल गंभीर बना हुआ है।
