पत्थरों का अवैध भंडारण जिम्मेदार नहीं कर रहे कार्यवाही
भले ही पर्यावरण कानून बन गये हों,लेकिन नियमों को किस तरह से दरकिनार कर कार्य पत्थरों का उत्खनन किया जा रहा है इसका जीता जागता प्रमाण अपना अनूपपुर जिला है। जहां पर कागजों में ही नियम कायदे चल रहे है और जमीन में इन नियम का पता नही है।
अनूपपुर- अनूपपुर जिले के कोतमा अंतर्गत कई क्रेसर नियम विरूद्ध संचालित हो रहे है जिसे देखने व रोकने वाला कोई नही है। क्रेसर संचालक नियमों को दरकिनार करते हुए हैवी ब्लास्टिंग कर पत्थरों का उत्खनन किया जा रहा है तो दिन रात क्रेसर चलाकर प्रदूषण फैला रहे हैं। वहीं क्रेसर के पास मनमाना बोल्डर का भण्डारण भी किया जा रहा है जिसकी शिकायत स्थानीय लोंगो के द्वारा उच्चाधिकारियों को करने के बावजूद भी कोई कार्यवाही इन क्रेसर संचालको के ऊपर नही हो रही ।
नही है नियमों की परवाह-
वैसे तो क्रेसर संचालित करने के लिए प्रदूषण विभाग से नियम शर्त के साथ अनुमति तो ले लेते हैं,लेकिन क्रेसर संचालक इन नियमों को दरकिनार करते नजर भी आते है। ऐसा ही हाल डोंगरिया स्थित अग्रवाल स्टोन क्रेसर का है जहां पर सारे नियमों को एक तरफ करते हुए सड़क के किनारे दिन रात खुले में क्रेसर संचालित हो रहा है। नियमतः क्रेसर संचालित करने के पूर्व आस-पास हरे भरे पेड़-पौधे व बाउंड्री वाल से क्रेसर को ढ़का होना चाहिए। जिससे प्रदूषण आस-पास के क्षेत्र में न फैल सके।
प्रदूषण से होती है गंभीर बीमारियां-
जानकारों की माने तो प्रदूषण से गंभीर बीमारियां भी होती है। आस-पास के ग्रामीणों का कहना है कि क्रेसरों से निकलने वाले लगातार धूल से अस्थमा,दमा,श्वास साहित कई प्रकार की गंभीर बीमारियां भी हो रही है। सड़क से आने जाने वाले राहगीरों को धूल के कारण भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है,लेकिन सभी नियमों को दरकिनार करते हुए क्रेसर संचालित हो ही रहा है और इस ओर प्रदूषण विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भी किसी प्रकार से कोई कार्यवाही नही कर रहे है।
निजी भूमि पर भंडारण व ब्लास्टिंग -
ग्रामीणों की माने तो जिस जगह पर अग्रवाल स्टोन क्रेसर संचालित हो रहा है वहां पे पत्थर उत्खनन करने के लिए विभाग के द्वारा अनुमति दी गई थी वहीं क्रेसर संचालक अपनी निजी भूमि में हजारों डम्फर पत्थरों का भंडारण किया हुआ है। वहीं पत्थर उत्खनन के दौरान होने वाले ब्लास्टिंग से भी आस-पास के ग्रामीण अंचलों में भय का माहौल बना हुआ है। बताया जाता है कि अग्रवाल स्टोन क्रेसर एक दिन में दर्जनों ब्लास्टिंग कर पत्थर का उत्खनन जोरो से चालू किया हुआ है,लेकिन आज तक किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने इनके क्रेसर पर कोई बडी कार्यवाही नही किये। जिससे मनमाने ढ़ंग से क्रेसर का संचालन किया जा रहा है।
क्या है पर्यावरण के नियम-
अनुछेद 21/14 और 19 को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रयोग में लाया जा चुका है। संविधान के अनुछेद 21 के तहत स्वस्थ वातावरण में जीवन जीने के अधिकार को पहली बार उस समय मानता दी गई थी,जब रूलर लिटीगेशन एण्ड इनटाइलमेंट केन्द्र बनाम राज्य एआईआर 1988 एससी 2187 देहरादून खदान केस के रूप में प्रसिद्व केस सामने आया था। यह भारत में अपनी तरह का पहला मामला था जिसमे सर्वोच्य न्यायालय में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत पर्यावरण व पर्यावरण संतुलन संबंधी मुद्दों को ध्यान में रखते हुए मामले में खनन गैर कानूनी खनन को रोकने के निर्देश दिए गए थे !