कोतमा-देश में बढ़ती महंगाई एवं पेट्रोल डीजल व रसोई गैस के दामों में हो रहे बेतहाशा बृद्धि से आम जनता त्राहि त्राहि कर रही है और अच्छे दिनों की झांसे में आकर अपने आपको ठगा महसूस करते हुये अच्छे दिन के जगह पर पुराने दिनों को ही लौटने की मांग कर रही है । उक्ताशय के विचार व्यक्त करते हुए समाजसेवी व वरिष्ठ नेता राजेश जैन ने कहा कि देश में पेट्रोल एवं डीजल के दामों में बेतहाशा वृद्धि के कारण लोगों के बीच हाहाकार मचा हुआ है और अच्छे दिन की आश लगाये बैठी जनता अब अपने पुराने दिनों को याद कर सरकार से कुछ टैक्स में कमी करके पेट्रोलियम पदार्थों के मूल्य में कमी कर राहत देने की मांग कर रही है । श्री जैन ने कहा कि पूरे देश में अनूपपुर जिले में पेट्रोल की दर ने सभी रिकॉर्ड को ध्वस्त करने के साथ साथ शतक बनाने का काम भी पूरा कर लिया है जिसके कारण महंगाई की दर में भी भारी उछाल आया है लोग किसी तरह थोड़ा बहुत पेट्रोल डीजल गाड़ियों में डलवाकर सरकार को कोसते हुये देखे व सुने जाते हैं उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अनूपपुर जिले में पेट्रोल की कीमत प्रति लीटर 100.00 रुपये को भी पार कर गया है जिससे लोगों की जेब ढीली हो रही है और डीजल पेट्रोल के दाम बढ़ने से जनजीवन बुरी तरह प्रभवित तो है ही ट्रांसपोर्टेशन मंहगी होने के कारण महंगाई में बेतहाशा वृद्धि हुई है जिससे आम लोगों को रोजमर्रा की आवश्यकता भी पूरी करने में दिन में तारे देखने के लिए मजबूर होना पड़ता है । श्री जैन ने कहा कि अनूपपुर जिले में डीजल 90.00 रुपये और पेट्रोल 100 रुपये प्रति लीटर को भी पार कर चुकी है जिससे आम जन में आक्रोश व्याप्त है और इसका सीधा असर लोगों के बजट पर पड़ रहा है । ब्लाक कांग्रेस कमेटी कोतमा के पूर्व अध्यक्ष राजेश जैन ने कहा कि कोतमा सहित कई अन्य क्षेत्र हैं जो छत्तीसगढ़ की सीमा से लगे हुए हैं और छत्तीसगढ़ राज्य में पेट्रोल व डीजल की कीमत मध्यप्रदेश राज्य की तुलना में करीब 10 से 12 रुपये कम हैं जिसके कारण अधिकांश वाहन मालिक छत्तीसगढ़ से पेट्रोल डीजल भरवाने का काम करते हैं साथ ही मध्यप्रदेश से छत्तीसगढ़ जाने वाले बड़े वाहन चालक मध्यप्रदेश के पेट्रोल पंपों में छत्तीसगढ़ पहुंचने भर का ईंधन डलवाकर छत्तीसगढ़ में टँकी फुल करवाने
का काम करते हैं जिसके कारण सीमावर्ती इलाकों के पेट्रोल पंपों में असर साफ देखा जा सकता है । उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल के दरों मेँ उतना उछाल नहीं आया है जितना सरकार टैक्स के नाम पर आम जनता के जेबों को काटने का काम कर रही है और पेट्रोल डीजल के वास्तविक दामों के अतिरिक्त दोगुना टैक्स सरकार वसूल रही है जिसके कारण पेट्रोलियम पदार्थों के दरों में बेतहाशा वृद्धि हुई है और सरकार को टैक्स में कमी करके पेट्रोलियम पदार्थों के मूल्य में कमी कर आम लोगों को राहत देनी चाहिए । समाजसेवी राजेश जैन ने कहा कि जबसे देश में मोदी सरकार आई है तबसे महंगाई की मार से जनता कराह रही है और अच्छे दिन के झांसे में आने के कारण पुराने दिनों को याद कर रही है आज हालात इतने बदतर हो गए हैं कि जनता नोटबन्दी जीएसटी से उबर नहीं पाई थी कि कोरोना महामारी के कारण लॉक डाउन के कारण पूरी अर्थव्यवस्था ही चरमरा गई आज भी ट्रेनों में सफर करने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है और पैसेंजर ट्रेनों का किराया बढ़ाने का काम किया गया है जिसके कारण आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है श्री जैन ने आशंका जताई है कि जानबूझकर ट्रेनों का सामान्य संचालन नहीं किया जा रहा है ताकि लोगों को अपने वाहनों से सफर करने के लिए मजबूर किया जा सके और इसके लिए पेट्रोल डीजल महंगे दामों में भी खरीदने के लिए विवश किया जा सके यह स्थिति अच्छी नहीं मानी जा सकती है उन्होंने केंद्र सरकार से मांग करते हुए कहा कि केंद्र व राज्य के टैक्सों में कमी करके आम जनता को कुछ राहत देने के साथ साथ वन नेशन वन टैक्स का फार्मूला पेट्रोलियम पदार्थों पर भी लागू कर इसे जीएसटी के दायरे में लायें ताकि लोगों को महंगाई से कुछ राहत मिल सके