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जिले में चौपट पड़ी स्वास्थ्य व्यवस्था इलाज के लिए लोग परेशान,पत्रकार ने तोड़ा दम

अनूपपुर- जिले भर में कोरोना के नाम पर जमकर रोना रोया जा रहा है और लोगो का मौसमी सर्दी जुखाम तक का इलाज नहीं किया जा रहा है और लोग दहशत के साए में जीने को मजबूर हैं।जिले भर में डॉक्टर खुद कोरोना से इतने डरे हुए हैं तो लोगो का इलाज कौन करेगा?जिला प्रशासन लाख दावे कर ले कि हमारे पास कोरोना से लड़ने के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध है पर जमीनी हकीकत तो यह है कि लोगो को बाटने के लिए दावा तक नहीं है।

तो क्या मुख्यमंत्री की घोषणा सिर्फ हवा हवाई-
विगत दिनों शुक्रवार को मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जब यह घोषणा की कि मीडिया कर्मियों और उनके परिवार के कोरोना संक्रमित होने पर पूरा इलाज सरकार कराया जायेगा। तो पत्रकारों में एक नई ऊर्जा आई और इस दानव रूपी कोरोना को हराने का साहस जुटा पाया। मगर जब वहीं अनूपपुर जिले के स्वास्थ्य की जमीनी हकीकत को खंगाला देखा गया तो मालूम हुआ कि बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था देने के नाम पर प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कोरी घोषणा कर रहे हैं। जैतहरी के पत्रकार संतोष गुप्ता/उपनाम बेटी कोविड सेन्टर में साँसों की जंग लड़ते लड़ते जिले की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था के आगे घुटने टेक दिया। संतोष गुप्ता का आरोप था कि "बहुत कष्ट है डॉक्टर ध्यान नही देते। अंतिम सांस तक उन्हे कोविड सेंटर से यह शिकायत रही कि नर्सों से इलाज कराया जा रहा है, डॉक्टर हाथ तक नहीं लगाते, दूर दरवाजे पर खडे रहते हैं।"
बहरहाल पत्रकार संतोष गुप्ता के अंतिम सांस का यह बयान सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज हो न हो। मगर जिले का स्वास्थ्य महकमा जिस तरह जनता की जान से खिलवाड़ में आमादा है,तो लाज़मी जनता के रिकॉर्ड में इनकी कार्यकुशलता दर्ज हो रही है।यही नही जिले का लचर स्वास्थ्य सिस्टम कितनी ज़िन्दगियों को अपनी आदतन लापरवाही से मौत को भेंट कर दिया,यह जांच का विषय जरूर है।
पत्रकार संतोष गुप्ता को हमारी ओर से विनम्र श्रद्धांजलि। ईश्वर परिवार को इस दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करे। ॐ शांति।
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