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आश्वासन पर अटकी जांच एसबीआई कोतमा में मची भर्रेशाही

दलालों के चंगुल में फंसा भारतीय स्टेट बैंक, सीधे नहीं होता हितग्राहियों का काम

कोतमा भारतीय स्टेट बैंक में मची भर्रेशाही से आम लोग खासे परेशान हैं यहां पर दलालों का ही बोलबाला है इन दलालों को और कोई नहीं बैंक के कर्मचारियों ने खुद पाल रखे हैं, अगर दलाल के माध्यम से आप बैंक पहुंचते हैं तो काम फटाफट नहीं तो आपका काम लटकता ही रह जाएगा इन दिनों लोन पास कराने के नाम पर दलालों ने अपना कोतमा स्टेट बैंक को ही ठीहा समझ लिया है यहां से भोले भाले आम लोगों को अच्छी कमीशन लेकर लोन पास कराने का आश्वासन देकर लोन पास कर आते हैं ,अगर इन दलाल के माध्यम से लोन पास नहीं कराया जाता तो लोन ही नहीं हो पाएगा तो ऐसे में कैसे सरकार की योजनाओं का लाभ आम लोगों को मिल पाएगा अब तक समझ से परे है !

अनूपपुर/विनय उपाध्याय - पूर्व में खबर पर संज्ञान के लेते हुए एसबीआई के अधिकारियों ने जांच के आदेश दिए थे जांच का जिम्मा एसबीआई शहडोल ब्रांच को मिला था लेकिन आश्वासन तक ही सीमित रह गया कई दिन बीत जाने के बाद भी जांच के नाम पर अभी मात्र खानापूर्ति ही हो पाई है ऐसे में कैसे आम लोगों को योजनाओं का लाभ मिल पाएगा अब भगवान ही जाने आपको बता दें सरकार की मनसा रही है कि बैंकों के माध्यम से सीधे आम लोगों तक ऋण उपलब्ध कराए जाएं आम आदमी को शासन की योजनाओं का लाभ तो नहीं मिल सका लेकिन हां परेशान जरूर हो गए, जबकि शासन के सख्त निर्देश है कि हितग्राही अगर बैंक आता है तो जल्द से जल्द उसका काम कर उसे पैसे उपलब्ध कराए जाएं लेकिन यहां पर तो मची भरेंशाही से ऐसा ही प्रतीत होता है कि आम लोगों की कोई पूछ परख है ही नहीं हां यह बात जरूर है कि भारतीय स्टेट बैंक के मैनेजर साहब यह कहते नजर आ रहे हैं कि जिनको शिकायत हो वह मुझसे व्यक्तिगत मिले, मजे की बात तो यह है कि काम आम आदमी का होता नहीं शिकायत करने मैनेजर साहब के पास जरूर पहुंच जाइए अब उस शिकायत पर कब तक अमल होगा यह नहीं कहा जा सकता !

यह है ऋण लेने की प्रक्रिया- मिली जानकारी के अनुसार आम आदमी को अगर ऋण लेना हो तो सीधे स्टेट बैंक में जाकर आवेदन करेगा इसके बाद फील्ड मैनेजर सारे दस्तावेजों जो की मांग करेगा, दस्तावेज की जांच करने के बाद आरएसीसी विभाग को ॠण के लिए आवेदन भेज देगा, अब खेला यही होता है अगर दलाल के माध्यम से या आवेदन इस विभाग में पहुंचता है तो ॠण पास होगा नहीं तो र
ॠण वहीं पर कैंसिल हो जाएगी क्योंकि आरएसीसी विभाग को ऋण देने का ना देने का अधिकार होता है, सारे दौड़-धूप करने के बाद अंत में हितग्राही आम लोगों को निराशा हाथ लगती है इसलिए आम लोग दलाल को ही चुनना पसंद करते हैं कहीं ना कहीं इस पूरे खेल में स्टेट बैंक के भी कर्मचारियों की मिली भगत साफ उजागर होती है, गौरतलब है कि हाल ही के दिनों आम लोगों को ऋण उपलब्ध न कराने पर तत्कालीन कलेक्टर चंद्रमोहन ठाकुर ने फटकार लगाते हुए भारतीय स्टेट बैंक सहित शाखा को या आदेशित किया था कि जल्द से जल्द उपलब्ध कराएं नहीं तो ॠण के पैसे प्राइवेट सेक्टर बैंक को उपलब्ध करा दिए जाएंगे और वहीं से ऋण बांटे जाएंगे !



इनका कहना है 
जांच जारी है अभी बीच पर मैं आया था ब्रांच के लोगों से मिलकर जांच की है अभी फिर से जाऊंगा ताम्रकार जी से मिलकर जांच को आगे बढ़ाई जाएगी !

अमरेश कुमार 
जांच अधिकारी शहडोल ब्रांच
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