बिसेन तालाब को आम निस्तार हेतु खुलवाने किया प्रभारी मंत्री ओमकार सिंह से अनुरोध
कोतमा/रमाकांत शुक्ला- जनहित के मुद्दे को लेकर कोतमा नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती मोहिनी वर्मा वार्ड नं 6 स्थित बिसेन तालाब को आम निस्तार और जन उपयोग को प्रभावित कर पूरे तालाब को बॉउंड्री से कैप्चर कर कब्जा करने के विरोध दर्ज कराने शहडोल प्रभारी मंत्री ओमकार सिंह मरकाम संभागायुक्त शहडोल,पुलिस महानिरीक्षक शहडोल,को ज्ञापन दिया गया।साथ ही प्रशासन से बिसेन तालाब को बॉउंड्री मुक्त कराने की और आम निस्तार हेतु खोलने की अपील की गई।इस मुहिम में कोतमा नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती मोहिनी वर्मा,महिला शक्ति के साथ नगर के समाजसेवी युवको की विशाल संख्या उपस्थित थी। विदित होकि नगरपालिका कोतमा के वार्ड क्रमांक 6 में स्थित बिसेन तालाब पर स्थानीय लोगों द्वारा कब्जा कर चार-दीवारी का निर्माण कर लिया गया है। जिसके विरोध में नगर के युवाओं ने आवाज उठाते हुये प्रशासन से मांग की थी।कि नगर हित में उक्त तालाब को अतिक्रमण मुक्त कराते हुये कब्जेधारियों को बेदखल किया जाये। जिससे आम जनों को आम निस्तार का लाभ मिल सके।किन्तु शिकायत के बावजूद प्रशासन द्वारा कोई भी कार्यवाही न करते हुए उस बॉउंड्री को यथावत छोड़ दिया गया साथ ही कोतमा क्षेत्र के चुने हुये जनप्रतिनिधियों ने बिसेन तालाब के मामले में भले ही चुप्पी साध रखी हो क्षेत्र के युवा इस मामले को लगातार उठाते रहे हैं और जनता भी चुने हुये प्रतिनिधियों का दोहरा चरित्र इस मामले में स्पष्ट देख रही है।जनहित के मुद्दे को लेकर वर्तमान नगर पालिका अध्यक्ष मोहिनी वर्मा ने तालाब को कब्जा मुक्त कराकर आम निस्तार हेतु खुलवाने के लिए कमरकस चुकी हैं।इस मुद्दे को लेकर कोतमा नगर पालिका अध्यक्ष ने अपने लेटर पैड में प्रभारी मंत्री सहित संभागायुक्त व पुलिस महानिरीक्षक को लिखित में ज्ञापन दी हैं।
क्या है मामला-
ग्राम कोतमा तहसील कोतमा अनूपपुर के अंतर्गत भूमि को सर्वे बंदोबस्त के समय से तालाब तत्कालीन महाराजा के समय से कायम किया गया था, उसमें सार्वजनिक उपयोग एवं उपभोग लगातार होता आ रहा था। उन भूमियों को बगैर किसी वैधानिक अंतरण के तथा बगैर वैधानिक आदेश के मुनौअर अली के नाम दर्ज कर दिया गया। जिसकी शिकायत के पश्चात उक्त भूमि मध्यप्रदेष शासन के नाम दर्ज कर दिया गया। किंतु कुछ वर्षों पश्चात राजस्व अधिकारियों के साथ मिलीभगत करते हुये मुनौअर अली, लियाकत अली आदि ने तत्कालीन एसडीएम के साथ मिलकर पटटा बनवा लिया। जिससे सामाजिक उपयोग व निस्तार का तालाब व्यक्तिगत खाते में चला गया। जिसमें वर्तमान समय में बाउंड्री कराकर लियाकत अली के द्वारा उक्त भूमियों को खुर्द-बुर्द करने का प्रयास किया जा रहा है। मध्यप्रदेष राज्य गठन के दौरान विंध्य क्षेत्र में मौजूद जमीनों के मामले में दस्तावेजों में हुये छेड़छाड़ की बदौलत कई कास्तकार बड़े जमींदार हो गये तो कई लोगों को परिवार के लिये छत तक नसीब नही हुई। जमीन के इस हेराफेरी में विंध्य क्षेत्र के वर्तमान अनूपपुर जिले के कोतमा जनपद में तालाब और तालाब के मेढ़ के भी कई भू-स्वामी बन गये।
क्या कहते हैं युवा-
मध्यप्रदेष राज्य गठन के बाद प्रदेष की समस्त भूमियों की खाताबंदी करने के लिये सभी जमीनों की खतौनियां तैयार की गई जिसमें बसाहट के अलावा अन्य सभी जमीनों को शासकीय संपत्ति माना गया। वहीं कुछ जमीनों को मामले में मुक्तिधाम, शासकीय निर्माण, जंगल, निस्तार, कास्तकार के तहत जमीनों का विवरण किया गया। ऐसे में लियाकत परिवार को मिली जमीन के मामले में दस्तावेजों में छेड़छाड़ भी किये जाने की बात सामने आई है। कोतमा नगर पालिका वार्ड क्रमांक 6 में मौजूद खसरा क्रमांक 653 रकवा 0.23 व 652 रकवा 0.482, 654 रकवा 0.275 हेक्टेयर के वार्षिक खतौनी 1958-59 में नाकाबिले कास्तकार प्रकार कोठार में खसरा क्रमांक 653 रकवा 0.23 व 655 रकवा 0.482, 654 रकवा 0.275 लगभग 35 एकड़ की जमीन पर चले प्रकरण में तहसीलदार के द्वारा जो तालाब निस्तार प्रयोजन में है राज्य सरकार के आदेष 6 अप्रैल 1959 में पूर्ण रूपेण निहित माने जाएंगे।
जब नियमानुसार तालाब किसी के पटटे में नहीं हो सकता तो बिसेन तालाब में शासन का दोहरा चरित्र क्यों?
सार्वजनिक हित की सुरक्षा में ध्यान रखते हुये 6 अप्रैल 1959 से ऐसे सभी तालाब राज्य शासन मे पूर्ण निहित माने जाएंगे का फैसला सुनाया जिसें खसरा क्रमांक 652 रकवा 0.482, रकवा 0.934, खसरा क्रमांक 654 रकवा 0.275 कुल तीन किता मध्यप्रदेष शासन घोषित करने का आदेष तहसीलदार द्वारा दिया गया। आम निस्तार के तालाब पर शासन के आदेष के बावजूद कब्जा कर लिया गया और लगातार प्रशासन को जानकारी देने के बावजूद राजनैतिक रसूख के बल पर कब्जा कर लिया गया है जो कि गलत है। इससे आम निस्तार प्रभावित हो रहा है। राजस्व न्यायालय द्वारा शासन के नियमों के परे जाकर कुछ लोगों को तालाब का भू-स्वामी बन दिया गया। जबकि तालाब-मेढ़ चारागाह आदि सार्वजनिक प्रयोजनों की भूमि को शासकीय रखने का ही प्रावधान है। किंतु अपनी सीमा से परे जाकर अधिकारियों ने उक्त भूमि कोतमा के स्थानीय निवासी के नाम पर दर्ज कर लभ दे दिया गया। इस फैसले से वार्ड क्रमांक 6 के निवासियों को आम निस्तार में बड़े पैमाने पर परेशानी हो रही है।
इसी मुद्दे को लेकर कोतमा नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती मोहिनी वर्मा व नगर की वार्ड नं 6 की महिलाओं सहित नगर के समाजसेवी युवकों,राजकमल तिवारी,प्रदीप उपाध्याय,रवि ओझा,कल्याण सिंह डब्बू उपेंद्र सिंह, जितेंद्र भट्ट,पुनीत सेन,गागी, दीपक केशरी,अजय वर्मा,पंकज शर्मा,सुदर्शन रैकवार,राजेश त्रिपाठी,अतुल मिश्रा,तालकेश्वर,शुभम गौतम, अनिल साहू,आदित्य मिश्रा,आकाश रजक, सहित सैकड़ो की संख्या में युवा शक्ति संगठन के कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में शहडोल प्रभारी मंत्री ओमकार सिंह मरकाम,अपर संभागायुक्त जैन साब,डी एस पी सोनाली गुप्ता को लिखित शिकायत देकर उक्त तालाब को बॉउंड्री तुड़वाकर आम निश्तार हेतु खोलने का ज्ञापन दिया गया।
कोतमा/रमाकांत शुक्ला- जनहित के मुद्दे को लेकर कोतमा नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती मोहिनी वर्मा वार्ड नं 6 स्थित बिसेन तालाब को आम निस्तार और जन उपयोग को प्रभावित कर पूरे तालाब को बॉउंड्री से कैप्चर कर कब्जा करने के विरोध दर्ज कराने शहडोल प्रभारी मंत्री ओमकार सिंह मरकाम संभागायुक्त शहडोल,पुलिस महानिरीक्षक शहडोल,को ज्ञापन दिया गया।साथ ही प्रशासन से बिसेन तालाब को बॉउंड्री मुक्त कराने की और आम निस्तार हेतु खोलने की अपील की गई।इस मुहिम में कोतमा नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती मोहिनी वर्मा,महिला शक्ति के साथ नगर के समाजसेवी युवको की विशाल संख्या उपस्थित थी। विदित होकि नगरपालिका कोतमा के वार्ड क्रमांक 6 में स्थित बिसेन तालाब पर स्थानीय लोगों द्वारा कब्जा कर चार-दीवारी का निर्माण कर लिया गया है। जिसके विरोध में नगर के युवाओं ने आवाज उठाते हुये प्रशासन से मांग की थी।कि नगर हित में उक्त तालाब को अतिक्रमण मुक्त कराते हुये कब्जेधारियों को बेदखल किया जाये। जिससे आम जनों को आम निस्तार का लाभ मिल सके।किन्तु शिकायत के बावजूद प्रशासन द्वारा कोई भी कार्यवाही न करते हुए उस बॉउंड्री को यथावत छोड़ दिया गया साथ ही कोतमा क्षेत्र के चुने हुये जनप्रतिनिधियों ने बिसेन तालाब के मामले में भले ही चुप्पी साध रखी हो क्षेत्र के युवा इस मामले को लगातार उठाते रहे हैं और जनता भी चुने हुये प्रतिनिधियों का दोहरा चरित्र इस मामले में स्पष्ट देख रही है।जनहित के मुद्दे को लेकर वर्तमान नगर पालिका अध्यक्ष मोहिनी वर्मा ने तालाब को कब्जा मुक्त कराकर आम निस्तार हेतु खुलवाने के लिए कमरकस चुकी हैं।इस मुद्दे को लेकर कोतमा नगर पालिका अध्यक्ष ने अपने लेटर पैड में प्रभारी मंत्री सहित संभागायुक्त व पुलिस महानिरीक्षक को लिखित में ज्ञापन दी हैं।
क्या है मामला-
ग्राम कोतमा तहसील कोतमा अनूपपुर के अंतर्गत भूमि को सर्वे बंदोबस्त के समय से तालाब तत्कालीन महाराजा के समय से कायम किया गया था, उसमें सार्वजनिक उपयोग एवं उपभोग लगातार होता आ रहा था। उन भूमियों को बगैर किसी वैधानिक अंतरण के तथा बगैर वैधानिक आदेश के मुनौअर अली के नाम दर्ज कर दिया गया। जिसकी शिकायत के पश्चात उक्त भूमि मध्यप्रदेष शासन के नाम दर्ज कर दिया गया। किंतु कुछ वर्षों पश्चात राजस्व अधिकारियों के साथ मिलीभगत करते हुये मुनौअर अली, लियाकत अली आदि ने तत्कालीन एसडीएम के साथ मिलकर पटटा बनवा लिया। जिससे सामाजिक उपयोग व निस्तार का तालाब व्यक्तिगत खाते में चला गया। जिसमें वर्तमान समय में बाउंड्री कराकर लियाकत अली के द्वारा उक्त भूमियों को खुर्द-बुर्द करने का प्रयास किया जा रहा है। मध्यप्रदेष राज्य गठन के दौरान विंध्य क्षेत्र में मौजूद जमीनों के मामले में दस्तावेजों में हुये छेड़छाड़ की बदौलत कई कास्तकार बड़े जमींदार हो गये तो कई लोगों को परिवार के लिये छत तक नसीब नही हुई। जमीन के इस हेराफेरी में विंध्य क्षेत्र के वर्तमान अनूपपुर जिले के कोतमा जनपद में तालाब और तालाब के मेढ़ के भी कई भू-स्वामी बन गये।
क्या कहते हैं युवा-
मध्यप्रदेष राज्य गठन के बाद प्रदेष की समस्त भूमियों की खाताबंदी करने के लिये सभी जमीनों की खतौनियां तैयार की गई जिसमें बसाहट के अलावा अन्य सभी जमीनों को शासकीय संपत्ति माना गया। वहीं कुछ जमीनों को मामले में मुक्तिधाम, शासकीय निर्माण, जंगल, निस्तार, कास्तकार के तहत जमीनों का विवरण किया गया। ऐसे में लियाकत परिवार को मिली जमीन के मामले में दस्तावेजों में छेड़छाड़ भी किये जाने की बात सामने आई है। कोतमा नगर पालिका वार्ड क्रमांक 6 में मौजूद खसरा क्रमांक 653 रकवा 0.23 व 652 रकवा 0.482, 654 रकवा 0.275 हेक्टेयर के वार्षिक खतौनी 1958-59 में नाकाबिले कास्तकार प्रकार कोठार में खसरा क्रमांक 653 रकवा 0.23 व 655 रकवा 0.482, 654 रकवा 0.275 लगभग 35 एकड़ की जमीन पर चले प्रकरण में तहसीलदार के द्वारा जो तालाब निस्तार प्रयोजन में है राज्य सरकार के आदेष 6 अप्रैल 1959 में पूर्ण रूपेण निहित माने जाएंगे।
जब नियमानुसार तालाब किसी के पटटे में नहीं हो सकता तो बिसेन तालाब में शासन का दोहरा चरित्र क्यों?
सार्वजनिक हित की सुरक्षा में ध्यान रखते हुये 6 अप्रैल 1959 से ऐसे सभी तालाब राज्य शासन मे पूर्ण निहित माने जाएंगे का फैसला सुनाया जिसें खसरा क्रमांक 652 रकवा 0.482, रकवा 0.934, खसरा क्रमांक 654 रकवा 0.275 कुल तीन किता मध्यप्रदेष शासन घोषित करने का आदेष तहसीलदार द्वारा दिया गया। आम निस्तार के तालाब पर शासन के आदेष के बावजूद कब्जा कर लिया गया और लगातार प्रशासन को जानकारी देने के बावजूद राजनैतिक रसूख के बल पर कब्जा कर लिया गया है जो कि गलत है। इससे आम निस्तार प्रभावित हो रहा है। राजस्व न्यायालय द्वारा शासन के नियमों के परे जाकर कुछ लोगों को तालाब का भू-स्वामी बन दिया गया। जबकि तालाब-मेढ़ चारागाह आदि सार्वजनिक प्रयोजनों की भूमि को शासकीय रखने का ही प्रावधान है। किंतु अपनी सीमा से परे जाकर अधिकारियों ने उक्त भूमि कोतमा के स्थानीय निवासी के नाम पर दर्ज कर लभ दे दिया गया। इस फैसले से वार्ड क्रमांक 6 के निवासियों को आम निस्तार में बड़े पैमाने पर परेशानी हो रही है।
इसी मुद्दे को लेकर कोतमा नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती मोहिनी वर्मा व नगर की वार्ड नं 6 की महिलाओं सहित नगर के समाजसेवी युवकों,राजकमल तिवारी,प्रदीप उपाध्याय,रवि ओझा,कल्याण सिंह डब्बू उपेंद्र सिंह, जितेंद्र भट्ट,पुनीत सेन,गागी, दीपक केशरी,अजय वर्मा,पंकज शर्मा,सुदर्शन रैकवार,राजेश त्रिपाठी,अतुल मिश्रा,तालकेश्वर,शुभम गौतम, अनिल साहू,आदित्य मिश्रा,आकाश रजक, सहित सैकड़ो की संख्या में युवा शक्ति संगठन के कार्यकर्ताओं की उपस्थिति में शहडोल प्रभारी मंत्री ओमकार सिंह मरकाम,अपर संभागायुक्त जैन साब,डी एस पी सोनाली गुप्ता को लिखित शिकायत देकर उक्त तालाब को बॉउंड्री तुड़वाकर आम निश्तार हेतु खोलने का ज्ञापन दिया गया।




